कोरोना संक्रमण के कारण बंद की गई सरकारी अस्पतालों की ओपीडी शुक्रवार से आरंभ हो गई। लंबे समय बाद खुली ओपीडी में पहले दिन नाममात्र के मरीज पहुंचे। जिला अस्पताल में सन्नाटा पसरा रहा। ओपीडी में मरीजों की संख्या सैकड़ा भी पार नहीं कर सकी। डॉक्टर कक्ष में बैठकर मरीजों के आने का इंतजार करते रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी-पीएचसी का भी यही हाल रहा।
मार्च से शुरू हुई कोरोना की दूसरी लहर ने पंचायत चुनावों के बाद भयावह रुप ले लिया था। बड़ी संख्या में डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारियों के कोरोना से ग्रसित होने के बाद जिला अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवा पर रोक लगा दी गई थी। सिर्फ इमरजेंसी सेवा के मरीजों का ही उपचार हो रहा है। ओपीडी में उपचार के लिए मरीज भटक रहे थे। उनकी परेशानी को देखते हुए सरकार ने ओपीडी सेवा को शुक्रवार से बहाल कर दिया। जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से ओपीडी का ताला खोलकर डॉक्टर-कर्मचारी मौजूद हो गए थे। मरीजों की संख्या ही कम रही। पूरे दिन महज 87 मरीज ही ओपीडी में पहुंचे। सामान्य दिनों में यह संख्या एक हजार से अधिक रहती है। मरीजों की कम संख्या के कारण मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के लिए बने ओपीडी कक्ष का ताला खोलने की भी जरुरत नहीं हुई। सीएमएस डॉ. एके शर्मा के मुताबिक पहला दिन होने के कारण मरीजों की संख्या कम रही। तमाम लोगों को अभी इस बारे में जानकारी नहीं रही होगी। शनिवार से संख्या बढ़ने की उम्मीद है।