रविवार को जफराबाद पुलिस ने अपने प्रयास से नौ वर्ष बाद एक पत्नी को पति से आमना-सामना करवाया। पत्नी-पति एक दूसरे को देख भावुक हो गए।
केराकत के खरकसीपुर गांव निवासी नरेंद्र प्रताप लखनऊ में बैंक में मैनेजर हैं। उन्होंने अपनी पुत्री मंजू देवी की शादी 2007 को जलालपुर के हरिपुर गांव निवासी राजकुमार के साथ किया था। राजकुमार तीन भाइयों में छोटा है। इस समय दिल्ली में लैब टेक्नीशियन पद पर काम करता है। शादी की शुरुआत के वर्ष में मंजू एक पुत्र की मां बन गई। समय के साथ सात वर्ष बीत गए। उसके बाद उसके परिवार तथा पति मंजू के दस लाख रुपये के जीवन बीमा के पैसे को निकाल कर देने का दबाव बनाया। इसके लिए मंजू को मारा पीटा गया। मंजू बेटे के साथ मायके आ गयी। उसके बाद एक वर्ष तक तो रिश्तेदार समझाने का प्रयास किए। लेकिन बात नहीं बनी। मंजू, बेटे के साथ मायके में रहने लगी। मंजू ने महिला थाने में तहरीर दिया था कि जगदीशपुर गांव में आकर रहने वाले उसके जेठ ने उसके पति को गायब कर दिया है। उनके होने पर भी अब संदेह लग रहा है। प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह ने तत्काल उसके जेठ को थाने बुलवाया। पहले तो उसके जेठ ने टाल मटोल किया। लेकिन पुलिस के कड़े रुख के बाद वह लाइन पर आ गया। उसने व्हाट्सएप के जरिए वीडियो कॉल किया। पत्नी ने पति को नौ वर्ष बाद जिंदा देखा तो उसकी आंखें भर आईं। हालांकि उसके बाद भी पति ने कोई बात नहीं की। मंजू ने बताया की वह अपने ससुराल में घर के एक कमरे में पुलिस की मदद से रह रही है। मंजू ने कहा कि उसने अभी पति को तलाक नहीं दिया है।