करंजाकला। उमानाथ सिंह स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई उधार के शव के सहारे कराई जा रही थी। अब जिला प्रशासन शव का इंतजाम कराएगा, जिससे छात्र-छात्राओं को सहूलियत होगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुरोध पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के आवेदन को जिला प्रशासन ने मंजूर कर लिया है। उमानाथ सिंह मेडिकल कॉलेज में पिछले दो सत्रों से एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को शव नहीं मिलने के कारण प्रैक्टिकल में परेशानी होती थी। छात्रों की पढ़ाई के लिए हर वर्ष आठ से नौ लाशों की की जरूरत होती है। एमबीबीएस की अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ रहे छात्रों के लिए शव मेडिकल कॉलेज बस्ती, बदायूं समेत दूसरे मेडिकल कॉलेजों से उधार में शव मंगाए जाते थे। वह भी समय से नहीं मिल पाते थे।
इस समय समय में पांच से अधिक शव प्रैक्टिकल के लिए रखे गए हैं। केमिकल में डुलाकर शवों को दो साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है, लेकिन चीर-फाड़ करने के कारण छात्रों को नए शव की जरूरत पड़ती है। शोध के लिए रखे शवों में केमिकल फॉर्मलीन इंजेक्ट किया जाता है। इससे शव खराब नहीं होते हैं। ऐसे शवों की डिमांड ज्यादा होती है, जिनका पोस्टमार्टम न हुआ और ज्यादा क्षत-विक्षत न हों। ऐसे में लावारिस शव सबसे बेहतर माना जाता है। इस समय से निपटने के लिए मेडिकल कॉलेज से कई बार शासन को पत्र भेजे गए थे। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जिला प्रशासन से संपर्क साधा। अब जिला प्रशासन मेडिकल कॉलेज को समय-समय पर शव उपलब्ध कराता रहेगा, जिससे छात्र-छात्राओं को प्रैक्टिकल में सहूलियत होगी।