जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में अपना दल एस ने ऐन वक्त पर रणनीति बदलते हुए एक तीर से तीन निशाने साधे। पार्टी और परिवार में दरार डालने का जिम्मेदार मानते हुए हरिवंश सिंह की बहू को चुनाव में शिकस्त देना और पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव प्रचार कर रहे भाजपा की जिला इकाई को सबक सिखाने के साथ धनंजय सिंह को जीत दिलाने की योजना में खुद को पार्टी अपनी सफलता के रूप में देख रही है।
अपना दल एस के राष्ट्रीय कमेटी में शामिल लोगों की मानें तो अनुप्रिया पटेल जौनपुर की सीट को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही थीं। पार्टी से जुड़े लोगों के मुताबिक अद एस पहले से ही श्रीकला को प्रत्याशी घोषित करने की तैयारी में थी, लेकिन सहयोगी दल भाजपा के कुछ नेताओं के दबाव में ऐसा नहीं हो सका। अद एस ने रीता पटेल को प्रत्याशी बनाया तो भाजपा की नीलम सिंह बागी बन गईं। भाजपा के कई नेता गठबंधन धर्म को दर किनार कर नीलम सिंह के लिए प्रचार प्रसार में जुट गए थे। ऐसे पार्टी ने ऐन मौके पर रणनीति को बदल लिया और चुनाव के दिन श्रीकला सिंह को समर्थन देकर सभी विरोधियों को सबक सिखाने में कामयाब हो गई।
वर्जन
भाजपा के स्थानीय इकाई द्वारा पूर्व सांसद हरिबंश सिंह की बहू को निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया गया, जो गठबंधन धर्म के विरुद्ध है। इसका स्पष्ट प्रमाण शनिवार को मिला। गठबंधन दल के प्रत्याशी को किसी भाजपा के जिला पंचायत सदस्य ने मत नहीं दिया। हमने काफी इंतजार किया। इसके बाद यह फैसला लिया। अपना दल एस की एक कार्यकर्ता भाजपा की बागी प्रत्याशी नीलम सिंह के धनबल के आगे हार गईं।
-आशीष पटेल, राष्ट्रीय संयोजक अपना दल एस