जौनपुर। खाद की दुकानों की जांच के नाम पर लूट मची है। सात नवंबर को थोक और फुटकर की करीब दो दर्जन दुकानों में छापेमारी कर अफसर रजिस्टर कार्यालय ले आए। यहीं व्यवसायियाें को बुलाया भी गया। लोग यहां पहुंचे तो कुछ को तुरंत छोड़ दिया गया। जबकि कुछ दुकानदारोें को जांच का हवाला देकर लौटा दिया। व्यवसायियों को आरोप है कि कार्यालय में पैसा लेकर मामले को खत्म किया गया है। पैसा नहीं देने की स्थिति में मामले को लटका दिया गया।
सात नवंबर को कृषि उपनिदेशक एसएन दुबे ने टीम गठित कर कई दुकानों पर जांच पड़ताल कराया था। अभियान के तहत बदलापुर, सिंगरामऊ, मड़ियाहूं, शाहगंज, मछलीशहर, नौपेड़वा सहित कई अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई थी। इस दौरान उर्वरकों का नमूना लिया गया था। साथ ही रजिस्टर, बिल, बाउचर अफसर कब्जे में ले लिए। कार्रवाई के लिए सभी को पालीटेक्निक चौराहा स्थित कृषि विभाग में बुलाया गया। कहा गया कि अभिलेखोें की जांच पड़ताल कार्यालय पर होगी। अफसर के पीछे-पीछे दुकानदार भी दफ्तर पहुंच गए। यहां व्यवसायियोें से काफी देर तक बात हुई। इसके बाद कुछ का मामला रफा दफा कर दिया गया। जबकि कुछ दुकानदारों के कागजात जांच के नाम पर रोक लिए गए। दुकानदारों का कहना है कि पैसा लेकर लोगों को छोड़ा गया है। जिसने पैसा नहीं दिया उनका मामला ही जांच के नाम पर लटका दिया गया। वसूली करने के लिए ही दुकानदारों को दफ्तर में बुलाया गया था। यदि ऐसा न करना होता तो रजिस्टरों की जांच दुकानों पर भी हो सकती थी। उधर, अफसरों ने पहली बार रजिस्टर लाने से ही इनकार कर दिया। किसी तरह स्वीकार भी किया तो सफाई दी कि छापेमार में समय लगता है। जब तक एक दुकान की जांच पड़ताल की जाएगी। इतने कई दुकानदार अपना प्रतिष्ठान बंद कर गायब हो जाते हैं। लिहाजा पहले दुकानों पर पहुंचकर रजिस्टर ही कब्जे में ले लिया जाता है। इससे सभी दुकानदार भाग नहीं पाते हैं। अफसरों ने पैसा लेकर मामले को खत्म करने से इनकार कर दिया। दुकानदार कार्रवाई के चलते गलत आरोप लगा रहे हैं।
वर्जन :
दिक्कतों को देखते हुए रजिस्टर कब्जे में लिया गया है। जांच पड़ताल के बाद वापस कर दिया जाएगा। यदि दुकानदारों को पैसा या अन्य कोई शिकायत है तो लोग शिकायत कर सकते हैं। - एसएन दुबे, कृषि उपनिदेशक