जौनपुर। हिंदी भवन में जनपद हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से रचना गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कवियाें ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर लोगों को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने अपनी रचना चलना ही जिंदगी का तो आदर्श है, पर कहां तक चलूं जब किनारा नहीं, सुनाकर की।
ओपी खरे ने जिंदगी की विसंगतियों पर व्यंग्य करती हुई अपनी रचना पेश की। डा. सुनील विक्रम सिंह ने कुंवारेपन का दर्द शीर्षक पर आधारित रचना पेश की। उनकी रचना उन्होंने तीन प्रकार के कुंवारों, आजीवन कुंवारे, चिर कुंवारे और तदर्थ कुंवारे होने का जिक्र किया। कदीर वचस्पति ने अपनी कविता इज्जत हमारी गांव, मोहल्ले, गली में हो, गिनती अरबपति या करोड़पति में हो, सुनाया। संजय श्रीवास्तव ने गोमती कविता के माध्यम से मानव सभ्यता के इतिहास को परिभाषित किया। ओम प्रकाश मिश्र ने अपनी कविता सुनाई। अंत में डा. आशुतोष उपाध्याय ने अपनी रचना सुनाई। अध्यक्षता डा. आशुतोष उपाध्याय ने की।