जौनपुर। चुनाव के ठीक पहले लाइसेंसी असलहों को जमा करवाने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। अब तक केवल दो फीसदी लोगों ने ही अपने असलहे जमा किए हैं। लोगों की दलील है कि यहां चुनाव अंतिम चरण में है। पहले असलहे जमा करने से जानमाल का खतरा हो सकता है। सबसे बड़ा सिरदर्द उन असलहाधारियों से है, जो या तो गैर जनपद से हैं या आपराधिक छवि के हैं। उन लोगाें को रियायत भी मिलेगी जिनको वास्तविक रूप से आवश्यकता है। एसडीएम, सीओ और थानेदारों को इस काम को प्रमुखता से कराने को कहा गया है।
जिले में चार हजार से अधिक लोगों के पास लाइसेंसी असलहे हैं। आचार संहिता लागू होने के बाद असलहों को जमा करा दिए जाने का फरमान जारी किया गया था। जिले की सातों सर्किल के अधिकारियों से लेकर थानेदारों तक को इसके लिए जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें उन लोगों के असलहे पहले जमा कराए जाने थे, जो या तो गैर जनपद या गैर सूबे के लाइसेंस लेकर जिले में रह रहे हैं। उन लोगों को भी फौरन असलहे जमा करने को कहा गया, जिन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं, लेकिन, पुलिस की यह मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है। लगभग सभी सर्किलों में औसत देखा जाए तो असलहा जमा करने का औसत दो से पांच फीसदी ही आ रहा है। अकेले सदर क्षेत्र में करीब 12 सौ असलहे हैं, जिनमें से सिर्फ 30 लोगों ने ही असलहे जमा किए हैं। असलहे जमा नहीं किए जाने की एक वजह यह भी है कि इसकी कोई अंतिम तारीख तय नहीं की गई है। बस कह दिया गया है कि जल्द से जल्द जमा कर दें। असलहे नहीं जमा करने के पीछे लोगों ने दलील भी दी है। बताया है कि जिले में मतदान आखिरीब् चरण में होना है। पहले असलहे जमा कर देने के बाद उनकी सुरक्षा का क्या होगा, जिसके लिए उन्होंने असलहे रखने का लाइसेंस लिया है। डीएम सुहास एलवाई ने एसडीएम, सीओ और थानेदारों की कमेटी बनाकर उन लोगाें की सूची बनाने का निर्देश दिया है, जिनके पास असलहे रहने से शांतिभंग की आशंका नहीं है। ऐसे लोगाें के असलहे जमा नहीं करवाए जाएंगे। वहीं, कमेटी उन लोगों के असलहों के लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश भी डीएम से करेगी, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। डीएम सुहास एलवाई ने बताया कि एसडीएम, सीओ और थानेदारों की कमेटी बनाई गई है। सूची बन रही है कि किससे असलहे जमा करवाया जाए। कमेटी की रिपोर्ट पर लोगों को चिन्हित कर असलहे जमा कराए जाएंगे। जिनको आवश्यकता है उन्हें रखने दिया जाएगा। बाकी लोग जमा करेंगे।