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लाशें तक खोद ले गए अंग्रेज

Mon, 11 Nov 2013 05:41 AM IST
Jaunpur
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जौनपुर। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के डायरेक्टर (अन्वेषण एवं प्रदर्शनी) सैय्यद जमाल हसन का कहना है कि पूरे हिंदुस्तान में सोना कहीं दफन नहीं है। अंग्रेज कहीं भी सोना छोड़ नहीं गए। वर्ष 2001 में असम की खोदाई के दौरान पता चला कि अंग्रेजी हुकूमत महाराजाओं, महारानियों, बेगम, बादशाहों की कब्र से लाशें तक खोद ले गई। खजाने की उम्मीद में जब कब्र से लाशें निकाल ले गए तो खजाने की बात बहुत दूर है। डौंडिया खेड़ा की खोदाई को तो बेवजह मीडिया ने सुर्खियों में ला दिया। खोदाई के लिए एएसआई ने पहले ही सर्वे कर लिया था। यह अलग बात है कि शोभन सरकार को उसी वक्त सपना आ गया। एएसआई डायरेक्टर मुहर्रम के मौके पर पैतृक आवास शहर के बलुवा घाट आए हुए हैं। रविवार को अमर उजाला से बातचीत में डौंडिया खेड़ा खोदाई से जुड़े विविध पहलुओं पर चर्चा की।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में असम में खोदाई उनकी निगरानी में हुई थी। यहां पिरामिड नुमा कब्रों की खोदाई के दौरान लाशों कोई अवशेष नही मिले। पहले यह भी हुआ करता था कि राजा, महाराजा, महारानियां, बेगम, बादशाह का अंतिम संस्कार जस का तस कर दिया जाता था। कुछ महारानियों और बुजुर्ग राजाओं पूरे श्रृंगार में दफन किया जाता था। खोदाई के दौरान तो गहनों के भी अवशेष नहीं मिले। अध्ययन में पता चला कि अंग्रेज तो खजाने की लालच में कब्रों से लाशें तक खोद ले गए थे।
उन्होंने कहा कि उन्नाव के डौंडिया खेड़ा में हो रही खोदाई उनका रुटीन काम है। किसी बाबा या ओझा के ख्वाब के आधार पर इतना बड़ा विभाग काम नहीं करता। यहां की साइट को विभाग ने पहले ही चिन्हित कर लिया था। बरसात का मौसम खत्म होते ही अक्तूबर माह में खोदाई करने की योजना बनी थी। इसे संयोग कहें या फिर मौके का फायदा। किसी बाबा ने सपना देख लिया और मीडिया ने तिल का ताड़ बना दिया। बाबा के दावे के साथ ही सारा मामला सनसनीखेज बन गया। इस खोदाई को लोगों और मीडिया ने बेवजह खजाने की खोज से जोड़ दिया। इतना सोना तो बादशाह अकबर के खजाने में भी नहीं था तो यहां कैसे हो सकता है। पुरात्व विभाग हमेशा पुराने जमाने के लोगों, उनके रहन-सहन, संस्कृतियों, इमारतों आदि के लिए काम करता रहता है। डौंडिया खेड़ा खोदाई उसी का एक हिस्सा है। किले की खोदाई में करीब 23 सौ साल पहले की मौर्य कालीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं। यहां से काले चमकीले तथा लाल चमकीले मिट्टी के बर्तन मिले हैं। यह बर्तन मौर्य काल में ही इस्तेमाल किए जाते थे। अब वहां कुछ खास नहीं बचा है। एक सप्ताह में खोदाई का काम बंद कर दिया जाएगा। विभाग दूसरी साइट देखकर वहां की सभ्यता के बारे में जानकारी इकट्ठा करेगा। इसी तरह कश्मीर, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बंगाल, दक्षिण भारत में खोदाई के दौरान कई सभ्यताओं का पता चला है। 1947 के बाद से भारत में जो भी खोदाई की गई है कहीं से भी खजाना नहीं मिला है। कहीं-कहीं से इक्का-दुक्का सोने और चांदी के सिक्के मिल जाते हैं। खजाना तो कहीं नहीं मिला।
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जावेद अहमद
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