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Jaunpur News: किडनी के 95 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा का है इंतजार

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जौनपुर। जिले में किडनी के मरीजों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। 95 मरीज ऐसे हैं जो आवेदन करके अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। मजबूरी में किसी निजी अस्पताल में अपनी डायलिसिस करा रहे हैं। जहां उन्हें एक बार डायलिसिस कराने के लिए 2000 से 2500 रुपये खर्च करना पड़ रहा है। जिले में किडनी के मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण डायलिसिस यूनिट में बेड कम पड़ने लगे हैं। मरीजों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। जिला अस्पताल में किडनी के मरीजों के लिए डायलिसिस यूनिट की सुविधा उपलब्ध है। डायलिसिस यूनिट में 15 बेड पर डायलिसिस मशीनें लगी हैं। इस समय 99 मरीजों का नियमित रूप से डायलिसिस चल रही है। 95 मरीज ऐसे हैं, जो अपना पंजीकरण कराकर छोड़ दिए हैं। उन्हें उम्मीद है कि बेड खाली होने पर उनका नंबर लग जाएगा। इन मरीजों के परिजन जिला अस्पताल में फोन कर हर रोज बेड खाली होने की जानकारी दे रहे हैं। ये मरीज ऐसे हैं, जो इमरजेंसी में अपनी डायलिसिस किसी निजी संस्थान में करा रहे हैं। निजी संस्थानों में उन्हें दो से ढाई हजार रुपये देना पड़ रहा है। मरीजों के लिए डायलिसिस यूनिट में बेड कम पड़ रहे हैं। मरीजों की संख्या को देखते हुए तीन शिफ्ट में डायलिसिस होती है। इसके बाद भी कुछ मरीजों को इंतजार है कि उनका नंबर लग जाएगा। एक शिफ्ट की डायलिसिस में चार घंटे का समय लगता है। मशीन पूरे 12 घंटे लगातार चलती है। सुबह आठ बजे से डायलिसिस शुरू होती है, जो रात 11 बजे तक चलती है। दो डायलिसिस के बीच में आधे घंटे का समय मशीन की सफाई और तैयारी में लग जाता है। डायलसिस सेंटर के मनीष यादव का कहना है कि आमतौर पर डायलिसिस सप्ताह में तीन बार किया जाता है और इसे करने में लगभग चार घंटे का समय लगता हैं। इसकी जरूरत तब पड़ती है, जब किडनी क्षतिग्रस्त होने के कारण रक्त में विषाक्त पदार्थों, अम्ल-क्षारों और पानी की मात्रा का संतुलन नहीं बना पाता। बढ़े हुए पदार्थों की यह मात्रा शरीर के लिए प्राणघातक सिद्ध हो सकती है।
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