बयालसी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को आयोजित अमर उजाला अपराजिता सजगता संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. अल्केश्वरी सिंह ने कहा कि पुरुष अपनी सोच बदलें और एकाधिकार छोड़ें। जब ऐसा होगा, तभी महिलाएं अपराजिता बनेंगी। उन्होंने कहा कि महिला हिंसा तभी रुकेगी, जब महिलाओं को समान अधिकार मिलेगा। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. गायत्री सिंह ने कहा कि घर और बाहर दोनों स्थानों पर महिलाएं उत्पीड़न का शिकार होती रही हैं।
चुप्पी किसी भी मामले का समाधान नहीं है। इसलिए अब इस हिंसा के खिलाफ महिला और पुरुष दोनों को मिलकर आवाज उठानी होगी। इंस्पेक्टर देवातानंद सिंह ने कहा कि अमर उजाला का अपराजिता अभियान समाज को एक संदेश देने का काम कर रहा है। इससे आने वाले समय में महिला हिंसा के खिलाफ प्रदेश में ऐसा वातावरण बनेगा, जिसमें हर कोई यह सोचने को मजबूर होगा कि सुरक्षित समाज हर महिला का हक है। डॉ. सीमा सिंह ने कहा अमर उजाला ने जड़ता को तोड़ने की जिम्मेदारी उठाई है। अब समाज को अपनी सोच बदलनी होगी। लोगों को सकारात्मक दिशा में सोचना होगा और नारी गरिमा को कायम रखने का प्रयास करना होगा।
कांस्टेबल निधि सिंह ने कहा सुरक्षित समाज हर बच्ची और हर महिला का हक है। समाज का नकारात्मक माहौल हमारे लिए चुनौती है। उन्होंने नौकरी-पेशे में आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया। डॉ. प्रतिभा सिंह ने कहा कि यह अभियान महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाएगा। अंजलि सिंह ने कहा कि अपराजिता के जरिए महिला सशक्तीकरण को नई धार मिलेगी। इससे महिलाओं का आत्मविश्ववास बढ़ेगा। छात्रा अंकिता चौबे, ज्योति, सरोज, दीपांजलि सिंह, रीमा पांडे ने नाटक के माध्यम से महिला सुरक्षा का संदेश दिया।