दो साल पहले ओला और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजे के लिए आई करोड़ों की धनराशि डंप पड़ी रही लेकिन जिला प्रशासन को किसानों को मुआवजा बाटने की फुर्सत ही नहीं मिली। अब वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने में सरकार को हिसाब देने का समय आया तो आननफानन में किसानों से बैंक खाता नंबर लेकर उनके खाते में धनराशि भेजने का काम शुरू हो गया है। ओला और अतिवृष्टि से प्रभावित 403145 किसानों को अभी भी मुआवजे की धनराशि का इंतजार है।
वर्ष 2015 में ओला और अतिवृष्टि से कृषि को भारी नुकशान हुआ था। प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने राजस्व अधिकारियों के माध्यम जिले की सभी तहसीलों से कुल 722476 किसानों का चयन किया था। इन किसानों को मुआवजा देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से शासन से 144 करोड़ के बजट की डिमांड की गई थी। वर्ष 2015-16 में 38 करोड़ 85 लाख व 2016-17 में 93.67 करोड़ का बजट जिला प्रशासन को मिला था। दो किस्तों में कुल 131 करोड़, 85 लाख का बजट किसानों को राहत पहुंचाने के लिए मिला था। लेकिन जिला प्रशासन अभीतक 319334 किसानों में महज 46 करोड़ 45 लाख 5 हजार 193 रुपये ही बांट सका। 85.39 करोड़, 94 हजार 807 रुपये जिला प्रशासन के खाते में डंप पड़ा है। अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने को हुआ तो शासन से भेजी गई धनराशि का हिसाब मांगा जाने लगा तो जिला प्रशासन को किसानों की राहत के लिए भेजे गए बजट की सुुधि आई और आननफानन में किसानों से उनका खाता नंबर लेकर पैसा उनके खाते में भेजा जा रहा है।
केराकत तहसील क्षेत्र के कुल प्रभावित कृषक 79792 थे, जिनके लिए शासन से 6 करोड़ 35 लाख रूपये की सहायता आया था। जिसमें से 42330 लाभार्थियों को चेक के द्वारा वितरित हो गया था। शेष 37462 किसान बचे हैं। क्षेत्र के ग्राम नुन्मतिया निवासी अमरनाथ यादव, राजकुमार चौहान, सत्यनारायण चौहान, बनारसी यादव, रामअवध यादव, राजबहादुर यादव, उदयभान यादव और ग्राम नरहन के धर्मजीत यादव ने बताया कि किसी को आपदा चेक नहीं मिला है। ग्राम परमानंदपुर के सरोज, नीतू, लालचन्द, सुनील आदि ज्यादातर लोगों को आपदा का चेक आज तक नहीं मिला है। ग्राम हुरूहुरी के सुशीला देवी ने बताया कि बहुत कम लोग को शायद मिला हो नहीं तो और किसी को नहीं मिला है। ग्राम शहाबुद्दीनपुर के सूरज कुमार का कहना है कि जिसकी पहुंच रही वही पाया है शेष को नहीं मिला है।