मछलीशहर। खेतों में नरवाई जलाने के बजाय किसान उसे मशीन के सहारे काटकर भूसा बनाने में जुटे हैं। उनकी इस पहल से वायु प्रदूषण की समस्या हल हुई है, साथ ही पशुओं के चारे समस्या भी हल हो रही हैं। गेहूं की कटाई के बाद खेतों में नरवाई (डण्ठल) नहीं जलाई जा रही है। बल्कि मशीन (स्ट्रारीपर) से डंठल की कटाई की जा रही है। अब अधिकतर किसान गेहूं काटने के बाद डंठल को निकलवा रहे हैं। गेहूं की कटाई के बाद खेतों में आग की लपटो से धुआं उठता नजर आता था। दरअसल ये आग की लपटें किसानों द्वारा खेतों में जलाई जाने वाली नरवाई की होती है। अब अधिकतर किसान खेतों में कंबाइन हार्वेस्टर द्वारा गेहूं की फसल की कटाई के बाद गेहूं के डंठल को एकत्रित कर रहे हैं और फिर स्ट्रा रीपर से इसकी कटाई कर रहे हैं। इससे पशुओं को खिलाने के लिए भूसा तैयार कर रहे है। इससे अब वायु प्रदूषण से राहत मिल रही है। रिपर से कटाई करने वाले जमालपुर गांव निवासी किसान नामवर सिंह ने बताया नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण होता है। साथ ही आसपास के खेतों में भी आग लगने की संभावना रहती है। ऐसे में इसे बंद कर दिया है। अब भूसे निकलने से फायदा हो रहा है और यह पशुओं को खिलाने के काम आ रहा है। किसान प्रकाश चन्द्र यादव ने बताया नरवाई जलाने से मित्र कीट नष्ट होते हैं। किसान धीरे-धीरे इससे दूर हो रहे हैं। अब अधिकतर किसान द्वारा रिपर की मदद से कटाई कर भूसा निकाल रहे हैं।