जौनपुर। परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका सार्थक परिणाम आ रहा है या नहीं इसके आंकलन के लिए दो माह पहले निपुण असेस्टमेंट टेस्ट यानी नैट कराया गया था। उसके परिणाम से पता चला है कि जिले के 70 हजार से ज्यादा बच्चे भाषा और गणित में कमजोर हैं, जबकि दो लाख 83 हजार से अधिक बच्चे अव्वल हैं। यानी इन्हें 60 फीसदी से अधिक अंक मिला है।
शिक्षा विभाग के अनुसार कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों को दो श्रेणी में बांटकर नैट कराया गया था। एक श्रेणी एक से तीन तक के बच्चे और दूसरे में चार से आठ तक के बच्चे शामिल थे। जो परिणाम आया उसमें एक से तीन तक की श्रेणी में कुल 24 हजार 716 बच्चे 60 फीसदी से कम अंक हासिल किए हैं, जबकि चार से आठ तक की कक्षा श्रेणी वाले 45 हजार 443 बच्चे ऐसे हैं जो कमजोर हैं। वहीं पहली श्रेणी के एक लाख 10 हजार से ज्यादा बच्चे और दूसरी श्रेणी के एक लाख 73 हजार से अधिक बच्चे 60 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए हैं। शिक्षा विभाग ने 60 फीसदी से कम अंक पाने वाले बच्चों को कमजोर मानते हुए सुधार के लिए विशेष प्रयास करने पर जोर दिया है। परीक्षा में गणित व भाषा पर जोर था।
इस तरह से हुआ श्रेणीकरण
नैट मूल्यांकन का जो रिजल्ट आया है उसे दो वर्ग में बांटा गया है। पहले तो कक्षा एक से तीन और दूसरा चार से आठ की कक्षा का। इन दोनों वर्गों में जो अंक के आधार पर संख्या दी गई है उसमें 90 फीसदी से अधिक अंक पाने वाले को ए प्लस, 75 से 90 फीसदी वाले को ए और 60 से 75 फीसदी वाले को बी श्रेणी दी गई है। इसी तरह 50 फीसदी से 60 फीसदी तक वाले को सी, 40 से 50 फीसदी वाले को डी और 40 फीसदी से नीचे वाले बच्चों को ई श्रेणी दी गई है।
विशेष योजना बनाकर मेधावी बनाने की तैयारी
इस परीक्षा के आधार पर जो आंकलन रिपोर्ट आई है उसी के आधार पर अब विशेष योजना बनायी जाएगी। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार सी, डी और ई श्रेणी के छात्र-छात्राओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभिन्न योजनाओं, पाठ्य गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाकर उन्हें ए प्लस, ए और बी श्रेणी में लाने पर जोर रहेगा। इसके प्रदर्शन के आधार पर स्कूलों का भी चिन्ह्नाकन किया जा रहा है।
नैट मूल्यांकन के परिणाम के आधार पर कमजोर बच्चों को चिन्हित करके उन्हें मेधावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। खराब प्रदर्शन वाले स्कूलों को चिन्हित किया जा रहा है। - डॉ. गोरखनाथ पटेल, बीएसए