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तीन साल में 19517 परिवारों को नसीब हुई छत

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जौनपुर। वर्ष 2016 से जिले में लागू प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुल 19517 परिवारों को पक्की छत नसीब हुई है। हालांकि 7482 आवासों का अभी निर्माण चल रहा है। 21 विकास खंडों वाले इस जिले में सबसे अधिक आवास का लाभ रामपुर विकास खंड को मिला है। रामपुर विकास खंड में तीनों वर्ष में कुल 2416 लोगों को प्रधानमंत्री आवास का लाभ दिए जाने का लक्ष्य था, जिसमें से 1929 आवास का निर्माण पूरा कर लिया गया है। संख्या के आधार पर देखें तो सिकरारा विकास खंड को सबसे कम 183 आवास मिला है। सिकरारा में तीन साल में 284 आवास बनाने का लक्ष्य था जिसमें से अभी तक सिर्फ 183 आवास बन सका है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहले चरण में जिले में कुल 12261 आवास बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था लेकिन वित्तीय वर्ष 2016-17 की समाप्ति तक 11761 लोगों इसका लाभ मिल सका था। यानी पहले साल में 500 आवासों का निर्माण समय से पूरा नहीं हो सका था। 1.20 लाख की लागत से बनने वाले आवास के लिए लाभार्थियों को तीन किस्तों में धन दिया जाता है। पहली किस्त में 40 हजार, दूसरी में 70 हजार और तीसरी और अंतिम किस्त में 10 हजार रुपये लाभार्थी के खाते में दिया जाता है। तीन वित्तीय वर्ष में अब तक बन चुके कुल 19517 आवासों के निर्माण पर 2.34 अरब 20 लाख 40 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। योजना शुरू होने के दूसरे साल वर्ष 2017-18 में 9133 लोगों को आवास दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें समय पर 7550 लोगों का आवास तो बनकर तैयार हो गया जबकि 1583 आवास दूसरे साल में भी समय से पूरे नहीं हो सके। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो सात जनवरी 2019 तक जिले में कुल 19517 प्रधानमंत्री आवास बन चुके हैं।

पीएम आवास के लिए पात्रता की शर्तें
जौनपुर। परियोजना निदेशक डीआरडीए अरविंद कुमार सिंह कहते हैं कि पीएम आवास के लिए योजना के शुरुआती साल में ही सर्वे कराकर पात्रता सूची विकास खंडवार तैयार की गई है। इस सूची में उन परिवारों को शामिल किया गया है, जिनके पास पक्का मकान नहीं है और आवास बनाने के लिए उनके पास आमदनी का कोई स्रोत नहीं है। इसी सूची से प्रत्येक वर्ष निर्धारित लक्ष्य के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर लाभार्थियों का चयन कर उन्हें आवास का लाभ दिया जाता है। आवास का लाभ दिए जाने से पूर्व एक बार फिर से लाभार्थी का सत्यापन खंड विकास अधिकारी के स्तर से कराया जाता है। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर लाभार्थी के खाते में पैसा भेज दिया जाता है।
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बोले लाभार्थी, पक्का मकान एक सपना था जो अब पूरा हो गया
जौनपुर। बक्शा विकास खंड के पूरे रामजी सुखराम कहते हैं कि वह मजदूरी करके परिवार की आजीविका चलाते हैं। परिवार में कुल आठ सदस्य हैं। रहने के लिए उनके पास छप्पर था। खास तौर से बारिश में अधिक परेशानी होती थी लेकिन अब आवास मिलने से रहने की परेशानी दूर हो गई। इसी विकास खंड के मई गांव निवासी स्वामीनाथ कहते हैं कि पहले रहने के लिए उनके पास छप्पर था। कभी दिन में जब बारिश होती थी तो चूल्हा नहीं जल पाता था। चूल्हा जलाने के लिए बारिश बंद होने का इंतजार करना पड़ता था लेकिन अब पक्का घर बनने से ऐसी परेशानी दूर हो गई। करंजाकला विकास खंड के पतहना गांव निवासी महताब बेगम कहती हैं कि उनका आठ सदस्यों का परिवार सिर्फ दो छप्पर में रहता था। बहुत परेशानी होती थी। छप्पर भी ठीक नहीं था, जिससे बारिश के समय पानी अंदर टपकता था। कई बार रात जागकर गुजारनी पड़ती थी। मुफ्तीगंज विकास खंड के कदहरा गांव निवासी रामप्यारी देवी कहती हैं पक्का मकान एक सपना था जो अब पूरा हो गया। मजदूरी कर के परिवार चलाती हूं। ऐसे में इस महंगाई के दौर में खुद से पक्का मकान बनवाना मेरी हैसियत नहीं थी।
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