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एसएलआर और एके 47 उगलेगी रंग

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जौनपुर। एसएलआर और एके 47 जैसे असलहे रंग उगलेंगे। होली पर सजे बाजार में रंग विरंगी पिचकारियों के बीच अत्याधुुनिक असलहों की सक्ल वाली पिचकारियां बच्चों को खूब भा रही हैं। होली का बाजार चाइना के सामानो से पट गया है। जैसए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने में चाइना भले ही रोड़ा बन गया लेकिन होली के बाजार में चाइना के तमाम सामान मौजूद हैं। स्वदेशी सामानों के बीच इन विदेशी सामानों के भी खरीददारंों की कमी नहीं है।
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रंगों के फुहार बरसाने के लिए पिचकारी, मास्क टोपी सहित अन्य आइटम बाजार में हैं। देशी होली के त्योहार में अब स्वदेशी पिचकारी की जगह चाइनीज एसएलआर और एके 47 पिचकारी ने ले रही है। टैंक और मिशाइल की डिजाइन वाली पिचकारी, बदलते समय के साथ नयी पीढ़ी की पसंद है। दुकानदार भी खरीदारों को लुभाने के लिए नयी डिजाइनर पिचकारियों के साथ चाइनीज मास्क, हैट और अन्य सामानों को दुकानों में सजाये हुए हैं। पिचकारी से लेकर मास्क और बाल भी चाइना के बने हुए हैं। जानकारों की मानें तो होली के मौके पर जिले में 40 से से 50 करोड़ का कारोबार होता है। जाहिर है कि इसमें एक बड़ा हिस्सा मेड इन चाइना के हिस्से में जाता है। जो कहीं न कहीं भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत के खिलाफ है। पहले जहां बच्चों के हाथों में बांस की बनी परंपरागत पिचकारी या फिर उसी शक्ल की प्लास्टिक की पिचकारी होती थी, वहीं अब इसकी जगह चाइनीज एके 47 और एसएलआर दिखाई देगा। हालांकि इसमें से गोली की जगह रंग ही निकलेगा लेकिन इसके प्रभाव आर्थिक रूप से दूरगामी साबित होंगे। बदलाव का एक रूप यह भी है कि बाजार में पीतल से लेकर लोहे और टीन तथा प्लास्टिक के परंपरागत पिचकारी भी 50 रुपये से 200 रुपये तक में मौजूद है लेकिन बच्चों की पसंद चाइनीज एके 47 ही बना हुआ है। रंग और पिचकारी के कारोबारी रतनलाल जायसवाल कहते हैं कि चाइनीज एके 47 की कीमत 300 रुपये और एसएलआर की कीमत 250 रुपये है। रंग, गुलाल, पिचकारी के अलावा चिप्स, पापड़ आदि की भी दुकानें सज गई हैं।
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