09- सुजानगंज क्षेत्र के भीलमपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में तमा बारिश का पानी।
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जौनपुर। परिषदीय विद्यालयों के जर्जर भवनों को ढहाने की प्रक्रिया पांच महीने में भी पूरी नहीं हो सकी। भवनों की गुणवत्ता की जांच के लिए गठित तकनीकी कमेटी ने सिर्फ 39 विद्यालय भवनों की जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई है जो कभी भी गिर सकते हैं। कुल 415 विद्यालयों की जांच तकनीकी कमेटी को करना है। अगर स्कूल खुलने से पहले इन जर्जर भवनों की जांच कराकर उसे ध्वस्त नहीं कराया गया तो कभी भी मासूम हादसे का शिकार हो सकते हैं।
शासन के निर्देश पर जिले भर के परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से जर्जर भवनों की सूचना मांगी गई थी। सभी 21 विकास खंडों से कुल 415 प्रधानाध्यापकों ने विद्यालय भवन जर्जर होने की सूचना बीएसए को दी थी। इनमें 353 प्राथमिक और 62 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन भवनों को ध्वस्त कराने से पहले उसकी तकनीकी जांच की जानी है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी ने अभी तक सिर्फ 39 विद्यालयों की जांच कर रिपोर्ट दी है कि भवन जर्जर हो चुका है उसे ढहाने की जरूरत है। बाकी भवनों की अभी तक जांच ही नहीं हो सकी। जबकि इसकी प्रक्रिया फरवरी महीने में ही शुरू कर दी गई थी। जर्जर भवनों को ध्वस्त कराने की प्रक्रिया जुलाई के अंत तक कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था लेकिन जिस गति से जर्जर भवनों की तकनीकी जांच की जा रही है उससे नहीं लगता कि चालू वर्ष में चिह्नित किए किए गए विद्यालय भवनों की जांच पूरी हो पाएगी। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि लॉक डाउन के चलते जर्जर भवनों की तकनीकी जांच पूरी होने मेें विलंब हुई है। अब जांच चल रही है। रिपोर्ट आते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।