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वन विहार पार्क के उद्धार के लिए 33 लाख का प्रस्ताव

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जौनपुर। वन विहार पार्क को अस्तित्व में लाने की तैयारी में जिम्मेदार फिर से जुट गए हैं। इसके लिए पिछले वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन कोरोना के प्रभाव के कारण स्वीकृति नहीं मिली थी। अब फिर से जिम्मेदार चालू वित्तीय वर्ष में प्रस्ताव बनाकर भेजने की तैयारी में जुट गए हैं। शासन से स्वीकृत मिलने के बाद पार्क की रौनक फिर से लौटेगी।
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एक जमाना था, जब वन विहार लोगों के घूमने और पिकनिक का प्रमुख केंद्र था। यहां जिला ही नहीं, बल्कि पड़ोस के आजमगढ़, भदोही, सुल्तानपुर, गाजीपुर, प्रतापगढ़ आदि स्थानों से लोग आते थे। इस पार्क में हिरण, बारह सिंघा, खरगोश आदि पशुओं को रखा गया था, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। पार्क में फल-फूल के पौधे भी लोगों का ध्यान खींचते थे। हरियाली से सराबोर पार्क में पर्यटकीय सुविधाएं भी विकसित की गई थीं। बाद में शासन के निर्देश पर पार्क में मौजूद वन्य जीवों को प्रयागराज भेज दिया गया। पार्क की मरम्मत के लिए बजट भी नहीं आया। उपेक्षा के चलते पार्क धीरे-धीरे अपना अस्तित्व भी खोता चला गया। वर्तमान समय में हाल यह है कि पार्क में सन्नाटा पसरा रहता है। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने इसे गंभीरता से लेते हुए वन विभाग से प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजवाया था। फरवरी में भेजे गए प्रस्ताव को अंतिम समय में मंजूरी नहीं मिल सकी थी। अब वन विभाग फिर से 33 लाख के प्रस्ताव को तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी में जुटा है। शीघ्र ही प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा। प्रभागीय वनाधिकारी जीसी त्रिपाठी का कहना है कि पार्क के कायाकल्प के लिए फिर से कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसे जल्द ही शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद पार्क का सुंदरीकरण शुरू होगा।
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