सतहरिया। वृंदावन धाम के कथावाचक स्वामी अंकिता नंद महराज ने कहा कि पुराणों में श्रीमद्भागवत पुराण महापुराण माना गया है। उन्होंने कहा कि कई जन्म जन्मांतर के पुण्य कर्मों के फल से श्रीमद्भागवत कथा सुनने का अवसर मिलता है। भागवत पुराण कथा श्रवण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण से मित्रता प्रसंग का बड़े ही मनोरम तरीके से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति के आगे भगवान को झुकना पड़ा। यही भगवान का स्वभाव है। पत्नी सुशीला के कहने पर ब्राह्मण सुदामा, भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिकाधीश के लिए प्रस्थान कर देते हैं। अटूट मित्रता के साथ भगवान के प्रति भावभक्ति का फल रहा कि श्रीकृष्ण ने रास्ते में पड़ी नदी को केवट का रुप धारण करके उन्हें निंद्रा अवस्था में लाकर पार कराकर द्वारिकाधीश पहुंचा दिए। उन्होंने कहा कि भाव भक्ति के साथ प्रभु को याद करने पर भक्तों की सहायता के लिए भगवान उसके पास हमेशा खड़े रहते हैं। जब द्वारपालों ने सूचना दिया कि कोई सुदामा नाम का व्यक्ति आपसे मिलना चाहते हैं। इतना सुनते ही श्रीकृष्ण नंगे पांव सुदामा से मिलने महल के बाहर दौड़ पड़े। उन्हें गले से लगा लिया। मित्र सुदामा को अपने सिंहासन पर ले जाकर बैठाया। जल से नहीं अपने नेत्रों के आंसुओं से उनका पांव धोया और भाभी सुशीला का कुशल पूछा। पोटरी में बंधे तंदुल को बड़े चाव से भोग लगाया। संत ने कहा कि अर्जुन के साथ बहन सुभद्रा की शादी में आयोजित राजसी यज्ञ में भगवान श्रीकृष्ण ने पत्तल वगैरह उठाने सरीखे सेवा भाव का काम लिया था। मुख्य यजमान विमला जायसवाल के साथ आयोजक मंडल ने अंगवस्त्रम देकर उन्हें सम्मानित कर विदा किया। इस मौके पर मनोज जायसवाल, अनिल कुमार, सुनील कुमार, सुशील कुमार, कृष्णा, ऊषा, संध्या, ममता ने आशीर्वाद लिया। चेयरमैन शिवगोविंद साहू ने माल्यार्पण कर उनका आशीर्वाद लिया। संचालन कृष्णा गोपाल जायसवाल ने किया।