सतहरिया। संत अंकिता नंद महाराज ने कहा कि संस्कारों में नामकरण संस्कार का विशेष महत्व होता है। वह पापी को पावन बना देता है। दुष्कर्मी अजामिल ने अपने पुत्र का नाम नारायण रखा था। उसी नाम को लेने से उसका उद्धार हो गया। शक्ति पीठ मां काली मंदिर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन श्रद्धालुओं के बीच कथा में उन्होंने कहा कि जब ऋषि गर्गाचार ने कृष्ण नाम रखा तो मां यशोदा को नाम का अर्थ जानने के लिए उनके मन में अभिलाषा पैदा हुई। ऋषि ने बताया कि तुम्हारा लाल माखन, चित, गोपियों का चीर चोर होगा। तब मइया यशोदा को राहत हुआ कि चलो हमारा लाल पैसों की चोरी तो नहीं करेगा। संत ने कहा कि गोपियों के चित्त का प्रभु ने हरण कर लिया था। गोपियां हमेशा भगवान के दर्शन के लिए बहाना ढूंढती रहती थी। संत ने कहा कि भगवान की महिमा अपार है। उनकी सबसे बड़ी चोरी यह है कि अगर कोई जीव प्रभू के पास पहुंचता है। उसके सारे पाप को भी चुरा यानी हरण कर लेते है। भगवान के दर्शन मात्र से पापियों के सारे पाप धुल जाते है। उन्होंने कहा कि मिट्टी खाने के बहाने भगवान कृष्ण ने जब अपना मुंह मइया यशोदा के सामने खोला तो उसमें सारे ब्रह्मांड की चीजों को देखा तो वे घबरा गई। संत ने गोवर्धन पूजा प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश डाला। भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाते ही प्रभु की जायकारों से समूचा कथा स्थल गूंज उठा। मुख्य यजमान विमला जायसवाल अपने परिवार संग कथा श्रवण कर रही है। मुख्य रूप से कृष्णा, ऊषा, संध्या, ममता, नीलम, मनोज, सान्या, साक्षी, अंशिका, सुशील, सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।