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प्राणी व प्रकृति एक दूसरे के हैं पूरक - पंडित कृष्णकांत

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बदलापुर। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को जब इंद्र का पूजन करने की तैयारी करते देखा तो उन्हें कर्म की नसीहत दी। बोले, केवल देवताओं की उपासना करके कुछ हासिल नहीं किया जा सकता। श्रेष्ठ कर्म करके प्रभु का कृपा पात्र बना जा सकता है। ये बातें वृंदावन से पधारे पं. कृष्णकांत महाराज ने चंदापुर गांव में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत भागवत कथा में शनिवार को गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीला को प्रकृति व प्राणी दोनों के ही संरक्षण का उपाय प्रस्तुत किए। मानव प्रकृति व पर्यावरण एक दूसरे के पूरक व संरक्षक हैं। गोवर्धन पूजा इसी समन्वय पर आधारित है। मनुष्य के सच्चे देवता नदी, झरने, पहाड़, वृक्ष, जीव व पर्यावरण जो मनुष्य के जीवन का संचालन करते हैं। श्रीमद् भागवत कथा में अहंकार को सबसे खतरनाक स्वभाव बताया गया है। कथा के दौरान गोर्वधन भगवान की मनोरम झांकी सजाया गया था, जो आकर्षण का केंद्र बनी रही। आयोजक हरिप्रसाद तिवारी ने आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर सुभाष तिवारी, लाल साहब सिंह, प्रभाकर चतुर्वेदी, शिवप्रसाद तिवारी, राजेंद्र सिंह, बृजनारायण, अरविंद, अवनीश सिंह आदि मौजूद रहे।
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