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एनजीटी टीम ने जगह-जगह बिखरा पाया कूड़ा और बायो वेस्ट

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जौनपुर। जिला अस्पताल से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में जगह-जगह मेडिकल बायो वेस्ट और कूड़ा फेंका जा रहा है। इसके निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के तहत भी चयनित कर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल संचालकों की मिलीभगत से मेडिकल बायो वेस्ट निस्तारण के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। इसका खुलासा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की जांच में हुआ है।
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पत्रकारों को जानकारी देते हुए पूर्व न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय इलाहाबाद व चेयरमैन ईस्टर्न यूपी रिवर एंड वाटर रिसोर्स मानीटरिंग कमेटी डीपी सिंह ने कहा कि जिला अस्पताल की स्थिति अत्यंत खराब है। जहां पर सॉलिड वेस्ट तथा बायोवेस्ट मिक्स पड़ा हुआ है। उन्होंने बायोवेस्ट को अलग अलग रखकर उसका उचित निस्तारण करने का निर्देश दिया और कहा कि किसी भी प्रकार का कचरा सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में डंप नहीं होना चाहिए। टीम के सदस्यों को पॉलिटेक्निक चौराहा के निकट स्थित एक 100 बेड के अस्पताल में काफी गंदगी मिली। मेडिकल बायोवेस्ट कूड़ेदान में पड़ा हुआ था। यह देख टीम के सदस्य दंग रह गए। कमोवेश यही स्थिति शहर के सभी नर्सिंग होमो में है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एसके पांडेय का कहना है कि अस्पताल के पीछे हिस्से में लोग कूड़ा फेंक देते हैं। नगर पालिका को कई बार कहा गया कि कूड़ेदान का इंतजाम करें लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल बायोवेस्ट नहीं फेंका जाता। उसे अलग रखा जाता है।
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