सिरकोनी(जौनपुर)। निर्मल मन से याद करने पर भगवान मिलते हैं। अवध का मतलब ऐसा मन जिसमें किसी का वध व हिंसा का विचार न हो। निर्मल मन ही अवध है। जिसकी 10 इंद्रियां संयम में हों, वही जीव दशरथ है। जिसकी बुद्धि कुशल है वही कौशल्या हैं। उक्त बातें परम पूज्य संत प्रमोद दास जी महाराज ने बुधवार को वनसत्ती इंटर कालेज राजेपुर त्रिमुहानी में श्रद्धालुओं को भक्ति रसपान कराते हुए कहा। उन्होंने इन योग्यताओं के साथ जीवन में यज्ञ हो। यज्ञ मानें सर्व समाज के कल्याण की भावना। महाराज दशरथ ने ऐसा ही किया। जिससे प्रभु राम पैदा हुए। उन्होंने प्रभु राम का जन्म के लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भजन सुनकर उपस्थित श्रद्धालुओं को जयकारा लगाने पर विवश कर दिया। इस अवसर पर रामेस्वर प्रसाद, वासुदेव यादव, डॉ. छोटे लाल, राम चरन यादव, संजय यादव, बद्रीनाथ चौबे, महेंद्र प्रजापति, निर्मला, सुशील, मंजू आदि उपस्थित रहे।