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अति पिछड़े बदल सकते प्रत्याशियों की तकदीर

Wed, 08 May 2019 10:16 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जौनपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
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चुनावी गुणागणित का सारा हिसाब अधिसंख्य एवं सगठित जातियों के वोटों के हिसाब से जोड़ा जाता है लेकिन ऐसी तमाम असंगठित जातियां हैं, जिनके वोट किसी भी संसदीय क्षेत्र की चुनावी तस्वीर को बदल सकते हैं। भाजपा और बसपा-सपा गठबंधन ऐसे जातियों को अपने पक्ष में गोलबंद करने में लगे हैं। चुनाव के नतीजों का बहुत कुछ दारोमदार इन वोटों पर है।

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पिछली बार विधानसभा 2017 के चुनाव में भाजपा का सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल (एस) से समझौता करके गैर यादव पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश की थी। प्रदेश में भाजपा की बागडौर भी केशव प्रसाद मौर्य के हाथों में थी। इसके नतीजे बेहतर आए। अति पिछड़ी जातियों का बड़ा हिस्सा सपा को छोड़कर भाजपा के साथ चला गया। इस बार स्थितियां बदली हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अलग चुनाव लड़ रही है। मछलीशहर से निषाद समाज में गहरी पकड़ रखने वाले रामचरित्र निषाद का टिकट काटकर भाजपा ने बीपी सरोज पर भरोसा जताया। बीपी सरोज की अपनी बिरादरी में अच्छी पैठ है। ने राजभर एवं निषाद समाज को गोलबंद करने मे जुटे हैं। निषाद पार्टी के संजय सरोज भाजपा के साथ हैं। भाजपा ही नहीं समाजवादी पार्टी भी अपने इन पारंपरिक वोटों को गोलबंद करने में जुटी है। गठबंधन के मछलीशहर के प्रत्याशी टी राम और जौनपुर के श्याम सिंह यादव के पक्ष में लोगों को गोलबंद किया जा रहा है। सपा ने रामचरित्र निषाद को टिकट देकर उनके वोटरों को साधने की कोशिश की है। इन कोशिशों के बीच मतदाता चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में समझ पाना मुश्किल है कि उसका रुझान किधर जाएगा। पर सभी पार्टियों ने जातीय समीकरण साधने के लिए जाति विशेष के नेताओं को क्षेत्र में लगा रखा है।
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अतिपिछड़ी जातियों के वोट
जाति जौनपुर मछलीशहर
निषाद 103635 46278
राजभर 26437 53795
विश्वकर्मा 37171 33918
कहार 33060 38655
कोहर 26316 24330
गिरी 2296 6356
पाल 28977 29315
माली 2777 2763
नाई 19879 15716
अन्य 7000 5000

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