जौनरपुर। शनिवार की आधी रात के बाद बदले मौसम के मिजाज से किसान सहम गए। पुरवा हवा के साथ आसमान में काले बादल छा गए और बूंदाबादी शुरू हो गई। खेतों में पककर तैयार गेहूं, चना, मटर, अरहर की फसलों को लेकर किसान चिंता में डूब गए। हालांकि सुबह करीब साढ़े आठ बजे तक आसमान से बादल छट गए और धूप निकल आई । जिससे किसानंो ने राहत की सांस ली। किसानों और कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि अगर बारिश हुई तो गेहूं और चना के दाने काले पड़ जाएंगे। उसमें फफूद रोग लग सकता है। उपज के साथ गेहूं की मड़ाई का काम भी प्रभावित होगा।
शनिवार की रात में पुरवा हवा के साथ आसमान में बादल छाने लगे। रात में करीब दो बजे तक आसमान में घने बादल छा गए। जिससे किसान परेशान हो गए। इस समय बारिश हुई तो किसानों का नुकसान ही नुकसान है। गेहूं, चना, मटर, सरसों, अरहर आदि फसलें खेतों में पककर तैयार हो चुकी है। जहां तहां मड़ाई का काम भी शुरू हो गया है। बक्शा के दरियावगंज निवासी किसान सुरेश यादव कहते हैं कि गेहूं की मड़ाई का काम शुरू हो गया है। बारिश हुई तो फसल भींग जाएगी और मड़ाई का काम रुक जाएगा। बारिश तेज हुई तो गेहूं और चना की गुणवत्ता भी खराब हो जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा. संदीप कुमार का कहना है कि इस समय बारिश हुई तो किसानों को दिक्तत ही दिक्कत है। शनिवार की रात से लेकर सुबह तक बूंदा बादी के बाद मौसम साफ हो गया जिससे कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन बारिश हो गई तो अरहर, चना, सरसों, गेहूं, मटर जितनी भी फसलें भींगेगी सभी को नुकसान होगा। गेहूं और चना के दानों में फफूद लग जाएंगे और दाना काला पड़ जाएगा। आम की फसल को भी नुसकान होगा। आम के बौर में भी काला फफूद लग जाएगा और टिकोरे झड़ जाएंगे। मौसम में नमी होने पर किसान आम की फसल में 2.5 ग्राम घुलनशील सल्फर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साफ मौसम में भी अगर आम के टिकोरे सामान्य से अधिक झड़ रहे हैं तो किसान कार्बेंडाजिल एक ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें इससे लाभ होगा।