जौनपुर। प्रदेश सरकार ने नदी, तालाबों से अवैध कब्जे हटाने का निर्देश सभी जिलों के डीएम को दिया है। बावजूद इसके प्रशासन गंभीर नहीं है। गोमती नदी की 100 एकड़ से अधिक भूमि पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। लेकिन नदी की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए की पहल नहीं हो सकी है। नदी का जलस्तर जैसे जैसे नीचे जा रहा है वैसे वैसे लोग नदी क्षेत्र में कब्जा करते जा रहे हैं। कहीं मकान तो कहीं स्कूल की बिल्डिंग बन गई है। शहर में कलीचाबाद से लेकर रामघाट तक नदी के दोनों छोर पर अतिक्रमण कर लिया गया है। लेकिन प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।
गोमती नदी शहर के मध्य से होकर गुजरती है। जिले में तकरीबन 70 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सफर तय करने वाली यह नदी जिले की सुल्तानपुर की सीमा से प्रवेश कर गाजीपुर की सीमा में निकलती है। शहर में गोमती के घाट भी सुरक्षित नहीं हैं। घाटों पर कब्जा कर लिया गया है। नदी में तेजी से पानी का जलस्तर नीचे खिसकने की वजह से नदी सूख रही है। इसका लाभ उठाते हुए लोगों ने नदी की जमींन पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। नदी वाले क्षेत्र में स्कूल, कालेज, मकान बनाएं जा रहे है। कटघरा इलाके में तो पूरी कालोनी ही नदी की जमींन पर बसा दी गई है। कब्जा करने की होड़ एवं अतिक्रमण से नदी कराह रही है। गोमती के ऊपरी जलधारा में स्थित नगर सीमा कलीचबाद से नदी की निचली जलधारा के नगर की सीमा रामघाट तक लोगों ने नदी के दोनों छोर पर कब्जा जमा लिया है। अवैध कालोनी , मकान ,तुतीपुर ( तड़ताल) में घाट के समीप लोग बनाने में जुटे है। गूलरघाट के पास नदी की जलधारा को अवरुद्ध करते हुए निर्माण करा लिया गया है। केरारबीर मंदिर से बलुआ घाट तक नदी के किनारों को कब्जा कर मकान बनाएं जा रहे है। जोगियापुर मोहल्ले में भी अस्थाई निर्माण करना शुरू कर दिया है। कमोबेश ऐसी स्थिति अचला देवी घाट, मिंयापुर, और सूरजघाट के आस पास क्षेत्र में भी है।
नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए शीघ्र ही अभियान चलाया जाएगा। पैमाइश कराकर अतिक्रमण को हटवाया जाएगा। अगर कहीं लेखपाल की संलिप्तता संज्ञान में आई तो कार्रवाई की जाएगी।
अरविंद मलप्पा बंगारी
डीएम