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भक्ति बिन अधूरा रहता है ज्ञान वैराग्य: पं. रामाश्रय

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डोभी। कथा वाचक पंडित रामाश्रय शुक्ल ने कहा कि जब तक हृदय में प्रेम न जगे, जब तक भक्ति न जगे तब तक ज्ञान वैराग्य एक ढोंग बन कर रह जाता है। क्योंकि बिना भाव के ज्ञान, भक्ति, वैराग्य सही दिशा में नहीं चल सकते। यही कारण है की भक्ति बृंदावन में विलाप कर रही है। वह चंदवक बाजार स्थित बिहारी सोनी धर्मशाला में चल रहे सात दिवसीय भागवत कथा के पहले दिन भक्तों की बीच प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो ज्ञान अपने बड़ों का सम्मान देना नहीं जानता, जो ज्ञान दूसरों को उठाने के जगह गिराना जानता है, वो ज्ञान वृद्ध है, वो ज्ञान कभी वैराग्य नहीं प्राप्त कर सकता। सूत जी कहते है कि पूरे संसार में मात्र एक धर्म है ‘प्रेम’ एक ही धन है ‘राम’ एक ही उद्देश्य है प्रभु दर्शन, एक ही भक्ति है प्रभु सुमिरन। इस अवसर पर चंद्रिका यादव, धीरज सिंह, संजय गुप्ता, भुल्लन सिंह, छेदी लाल नाविक, कन्हैया सेठ, प्रकाश सेठ, विशंभर गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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