जौनपुर। पवारा थाना क्षेत्र के चितांव बनई नाला के पास चार साल पूर्व संपत्ति की लालच में अधिवक्ता रामसूचित यादव की हत्या कर अधजली लाश ठिकाने लगाने के मामले में अधिवक्ता के सगे भाई सहित पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए मंगलवार को एडीजे षष्ठम महेंद्र सिंह ने खुले न्यायालय में आजीवन कारावास एवं 25-25 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाया। पांचों आरोपी अधिवक्ता के भाई, भाभी, भतीजी और भतीजे हैं।
अभियोजन कथानक के अनुसार मीरगंज के अलापुर निवासी अधिवक्ता की पुत्री मंगीता यादव ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उसके पिता रामसूचित यादव दीवानी न्यायालय में वकालत करते थे। प्रतिदिन सुबह ट्रेन से कचहरी आते थे और शाम को घर लौटते थे। 30 अक्टूबर 2015 को अधिवक्ता सुबह कचहरी के लिए निकले थे। शाम को घर वापस नहीं लौटे। परिवार वाले रात भर इंतजार करते रहे। दूसरे दिन शाम को सूचना मिली कि उसके अधिवक्ता पिता की लाश ग्राम चितांव पवारा बॉर्डर के बनई नाले के पास अधजली अवस्था में पड़ी है। मृत अधिवक्ता के कोई लड़के नहीं थे। सिर्फ तीन लड़कियां थी। आरोप था कि मृतक अधिवक्ता के भाई रामनारायण उसकी संपत्ति को हड़पना चाहते थे। इसीलिए अधिवक्ता की निर्मम हत्या की गई। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त गड़ासी पुलिस ने बरामद किया था। अभियोजन पक्ष से एडीजीसी अनूप शुक्ला व बलिराम यादव एडवोकेट ने गवाहों को कोर्ट में परीक्षित कराया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस एवं तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिशीलन के पश्चात मृतक अधिवक्ता के भाई आरोपी रामनारायण यादव, उसकी पत्नी सुशीला, पुत्री लक्ष्मी व आरती व लड़के विजय यादव को सजा सुनाई है। एक अन्य आरोपी रवि हाजिर न होने के कारण पहले से ही कोर्ट द्वारा फरार घोषित किया जा चुका है तथा एक आरोपी को कोर्ट ने नाबालिग घोषित कर दिया है।