जौनपुर । पैगंबर-ए-इस्लाम के दामाद और खलीफा हजरत अली की शहादत के चौदह सौ साल पूरे होने पर नगर के जामिया इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम में तीन दिवसीय कांफ्रेंस एवं मजलिसों का आयोजन किया गया, जिसमें धर्मगुरु, समाजसेवी , बुद्धजीवी एवं शायरों ने शिरकत की।
मौलाना सफदर हुसैन जैदी ने कहा कि मौला अली ंने अपना जीवन अल्लाह के हुक्म के मुताबिक बिताया। इमाम और खलीफा होने के बाद भी उनके जीवन का बड़ा हिस्सा इबादत में बीता था। हैदराबाद से आये धर्मगुरु मौलाना तकी आगा ने कहा कि हजरत अली की पैदाइश अल्लाह के घर पवित्र काबे शरीफ में हुई थी। मौलाना नाजिम अली खैराबादी ने कहा कि हजरत अली इस्लाम धर्म के इमाम व खलीफा बने। वह अपनी जिंदगी यहूदी के बाग में नौकरी करके बसर करते थे। खलीफा बनने के बाद भी सरकारी खजाने से अपने लिए और ना ही रिश्तेदारों के लिए कुछ लेते थे।
मौलाना काजिम मेहदी उरूज ने कहा कि मौला अली खुदा कि सिफात के आईनेदार कूफे की मस्जिद में सुबह की नमाज के वक्त शहीद कर दिये गये। 19 रमजान को सहरी के बाद जब सुबह की नमाज अदा की जा रही थी तो नमाजियों के बीच खड़े कातिल रहमान इब्ने मुलजिम ने जहर से बुझी तलवार से मौला अली पर वार कर दिया। मौला अली कातिल को जानते थे लेकिन उसे उन्होंने ही नमाज के लिए उठाया था। मौला अली ने निर्देश दिया कि इसके खाने-पीने का ख्याल रखा जाये और उसने तलवार से एक वार किया है तो उस पर भी एक ही वार किया जाए। मौलाना सुलतान हुसैन रिजवी , मौलाना रजा अब्बास , मौलाना मीसम रजा इब्ने मौलाना क़रार हुसैन मरहूम , मौलाना शौकत हुसैन , मौलाना हसन अकबर , मौलाना शाने आलम , मौलाना दिलशाद खान , मौलाना हैदर मेहदी , मौलाना मेराज हैदर खान , मौलाना जफ़र खान , मौलाना वसी मोहम्मद साहब , शोला जौनपुरी , दिलकश ग़ाजीपुरी , नजमुल हसन नजमी , मिर्जा जावेद सुल्तान , आरिफ हुसैनी मौलाना सैफ आब्दी , मौलाना ग़ालिब , मौलाना अब्बास रजा के साथ भारी संख्या में लोग मौजूद रहे । कार्यक्रम का संचालन सहर अर्शी ने किया ।