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एल-2 अस्पताल में 17 वेंटीलेटर, ऑपरेटर एक भी नहीं

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जौनपुर। कोरोना के मरीजों की तादाद बढ़ने के साथ ही चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। सबसे ज्यादा चुनौती उन मरीजों के उपचार को लेकर है, जिनमें संक्रमण का स्तर गंभीर है। ऐसे मरीजों के जिले में फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। एल-2 श्रेणी के अस्पताल में 17 वेंटीलेटर तो हैं, मगर ऑपरेटर नहीं। अब तक ऐसे मरीजों को वाराणसी भेज दिया जाता था, लेकिन वहां भी अधिकांश अस्पतालों के बेड भरने के बाद गैर जिलों से जाने वाले मरीजों के लिए मुश्किल बढ़ रही है। बिगड़ते हालात के बीच अब स्वास्थ्य विभाग विकल्प तलाशने में जुटा है।
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कोरोना के उपचार के लिए जिला महिला अस्पताल के मातृ-शिशु कल्याण केंद्र में सौ बेड का एल-2 अस्पताल बनाया गया है। अभी इसमें 16 मरीज ही रखे गए हैं। उन मरीजों को यहां रखा जा रहा है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी है और उन्हें निगरानी की सख्त जरुरत है। जरुरत पड़ने पर इन मरीजों के लिए आपात सेवा के तहत वेंटीलेटर भी लगाया गया है। कुल 17 वेंटीलेटर तो लगा दिए गए हैं, लेकिन इन्हें चलाने वाला कोई ऑपरेटर नहीं है। ऐसे में एल-2 में भर्ती मरीज की हालत बिगड़ने पर रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अभी तक इन मरीजों को वाराणसी में बने एल-3 अस्पताल में भेज दिया जाता था। अब वाराणसी में मरीजों की संख्या में वृद्धि होने के बाद वहां के अधिकांश अस्पतालों में बेड भर चुके हैं। वहीं के मरीजों को जगह नहीं मिल रही। ऐसे में जिले से जाने वाले मरीजों के लिए स्थितियां विकट हैं। कोरोना संक्रमित जिले के एक डॉक्टर को वेंटिलेटर के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा था। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद उन्हें बेड मिल पाया। तीन दिन पहले कोरोना से दम तोड़ने वाले वाजिदपुर के लोहा व्यापारी के परिजनों ने भी जिले में वेंटिलेटर की सुविधा न मिल पाने के कारण मौत का आरोप लगाया था। बढ़ती चुनौतियों के साथ अब स्वास्थ्य महकमा जिले में ही सुविधाओं को सुदृढ़ करने की कवायद में जुटा है।
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ऑपरेटर के लिए योग्य नहीं मिला कोई
कोविड-19 अस्पताल में मौजूद वेंटीलेटर चलाने के लिए पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने चयन प्रक्रिया शुरू की थी, मगर कोई योग्य अभ्यर्थी नहीं मिला। जो आवेदन आए थे, उनमें ज्यादातर को वेंटीलेटर के बारे में जानकारी ही नहीं थी। विभागीय लोगों के मुताबिक वेंटीलेटर लगाने के लिए अच्छी तरह प्रशिक्षित व्यक्ति की जरुरत है। थोड़ी सी चूक होने पर संक्रमित होने का खतरा है। लिहाजा कोई भी जोखिम लेने से कतरा रहा है।
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गांवों में 8700 निगरानी समितियां सक्रिय
जौनपुर। पंचायत चुनाव के लिए गांवों में बाहर से आने वालों की संख्या बढ़ रही है। बिना सूचना दिए ही वह प्रचार-प्रसार में लग जा रहे हैं। कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए गांवों में 8700 निगरानी समितियों को सक्रिय कर दिया गया है। प्रत्येक गांव में बनीं समितियों में पांच लोगों को शामिल हैं। समितियों में सफाई कर्मचारियों से लेकर अध्यापक, आशा व एएनएम को रखा गया है। उन्हें कंट्रोल रूम से भी जोड़ा गया है। सभी गांव में हो रही गतिविधियों की जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचाएंगे। डीपीआरओ संतोष कुमार ने बताया कि समितियों से प्राप्त सूचनाओं को एकत्रित कर इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। लापरवाही बतरने वालों की जानकारी संबंधित थानों पर भी दिया जा रहा है।
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आउटसोर्सिंग से चार वेंटिलेटर ऑपरेटर रखने की कवायद चल रही है। कोविड अस्पताल में तैनात होने वाले डॉक्टर व स्टाफ नर्स को भी प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वह त्वरित उपचार उपलब्ध करा सकें। इसका लाभ भी मिल रहा है। वाराणसी में मरीज भर्ती होने में अभी कोई दिक्कत नहीं है। वहां बेड बढ़ा दिया गया है। जिले में भी तमाम बेड खाली है। अन्य विकल्प भी देखे जा रहे हैं। -डॉ. राकेश कुमार, सीएमओ।
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