सतहरिया। फर्रुखाबाद के संत स्वामी विवेकानंद सरस्वती महराज ने कहा कि जो व्यक्ति भगवान की चरणों की वंदना और उपासना सच्चे मन और भाव से करता है तो उसका कल्याण संभव है। मुंगराबादशाहपुर के शक्ति पीठ मां कालीजी मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन आयोजित कथा में उन्होंने कहा कि भक्ति ही सफल जीवन जीने का असली मंत्र है। अटूट प्रेम के साथ चरण पकड़ने वाला ही भगवान का असली भक्त होता है। जो ऐसा करता है, वहीं कृष्ण स्वरूपा तथा जो भगवान से दूरी बनाता है तो वह कंस स्वरूपा होता है। श्रीकृष्ण के माखन चोरी, गोपियों की विरह वेदना और गोचर लीला का बड़े ही मनोरम तरीके से वर्णन किया। भगवान कृष्ण की बाल लीला अपरंपार है। माखन चोरी में गोपियां कृष्ण को लेकर मां यशोदा के पास शिकायत करने पहुंची तो मां यशोदा ने उनसे कहा कि जिन्हें तुम पकड़ कर लाई हो, घूंघट उठाकर देखों ये मेरे लाल नहीं, तुम्हारे लाल है। संत ने कहा कि भगवान ब्रह्मा ने भगवान कृष्ण की परीक्षा लेने आए। उन्होंने कृष्ण के साथ आए सभी गायों, बछड़ों और ग्वाल बालों को उठाकर ले गए थे तो भगवान कृष्ण ने अपनी योग माया से उन्हीं की प्रतिमूर्ति बनकर गोचर लीला शुरू कर दी। ब्रह्मा जी के रोम रोम से अनंत लोकों की सृष्टि हुई है तो उन्हें इसके लिए भगवान कृष्ण से क्षमा याचना करना पड़ा था। तब उन्हें पता चला कि साधारण नहीं साक्षात भगवान कृष्ण ब्रह्म है। उन्होंने कहा कि गाय माता से उत्पन्न सारी वस्तुएं उपयोगिता के साथ औषधि है किंतु आज उनकी कसाइयों द्वारा कत्ल किया जा रहा है। इसकी रोकथाम के लिए राजनेताओं तथा समाजसेवियों को आगे आना चाहिए। मुख्य यजमान भगौती प्रसाद कसौधन, कृष्णा देवी, प्रेमा देवी भक्ति भाव से कथा का श्रवण कर रही है।