सतहरिया। काली मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को फर्रुखाबाद से आए संत स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने कृष्ण जन्म के प्रसंग का रोचक वर्णन किया तो पंडाल में बैठे लोग भक्तिभाव से झूमने लगे। भगवान कृष्ण का जन्म होते ही सोहर और मंगल गीतों से परिसर गूंज उठा। गाजे-बाजे के साथ निकाली गई भगवान कृष्ण की भव्य झांकी का श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा से अभिनंदन किया। संत ने कहा कि जब कंस के लिए आकाशवाणी हुई कि इस धरा पर तुम्हारा काल बनकर भगवान कृष्ण का अवतार हो चुका है तो वह व्याकुल होने लगा। उन्होंने कहा कि मन की शांति तथा कर्म के प्रति सचेत करना ही श्रीमद्भागवत कथा का सार है। राम और कृष्ण दो ही पूर्णावतार हैं, बाकी सब कलावतार तथा अंशावतार हैं। सूर्य वंश में भगवान श्रीराम तथा चंद्र वंश में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था। रामचरित मानस प्रसंग में श्रीराम और जानकी के मिलन का वर्णन किया। कहा कि सीता को संशय था कि प्रभु श्रीराम इतने सुकुमार हैं, तो उनके हाथों से शिव धनुष कैसे टूटेगा। सीता स्वयंवर में जब मिथिला नरेश के मुंह से यह शब्द निकला कि पृथ्वी वीरों से खाली है तो लक्ष्मण तिलमिला कर खड़े हो गए। कहा कि अगर बड़े भइया का आदेश मिले तो मैं पूरे ब्रह्मांड को उठा कर दिखा दूं। फिर गुरु की आज्ञा पाकर भगवान राम ने शिव के धनुष तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जीवात्मा के साथ केवल धर्म व सत्कर्म ही साथ जाते हैं। वसुदेव की भूमिका स्वामी मगनानंद ने निभाई। इस दौरान भगौती प्रसाद कसौधन, कृष्णा देवी, प्रेमा देवी, कन्हैया, अंकित आदि मौजूद रहे।