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सत्संग से मनुष्य के मन में आते हैं अच्छे भाव: विवेकानंद

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सतहरिया। फर्रुखाबाद के संत स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा कि जिस प्रकार शरीर और वस्त्रों की सफाई के लिए धोने साबुन का प्रयोग किया जाता है, उसी प्रकार मन की सफाई के लिए जीवन में सत्संग जरूरी है। सत्संग से मनुष्य में अच्छे भाव और अच्छे विचार आते हैं। वह मुंगराबादशाहपुर स्थित काली मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को सत्संग के प्रभाव और भक्ति की महिमा का बखान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मन को नियंत्रित करने में सत्संग चाबुक की भूमिका निभाता है। सत्संग से प्रभु के प्रति समर्पण और अनुराग के भाव जागृत होते हैं। जिसका मन परमात्मा के अधीन होता है, वह कभी भी गंदा नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि संशय की अवस्था में अविनाशी शिव को भी शरीर का परित्याग करना पड़ा था। वास्तविक ज्ञान, विनम्रता, शिष्टाचार ये सभी सद्गुण पुण्य आत्मा के लक्षण हैं। जिसकी जिह्वा पर हरे राम, हरे कृष्ण का संकीर्तन आ जाता है, उसके जीवन में किसी प्रकार के विकार नहीं आते। राम नाम जीवन की नौका का खेवनहार है। इस मौके पर भगौती प्रसाद कसौधन, अंकित, अमित, विवेक, मनीषा, धीरेन्द्र वर्मा, अयोध्या प्रसाद गुप्त, तुलसी राम सोनी, अशोक कुमार आदि मौजूद थे।
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