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जैविक खाद से बढ जाती है फसल की उत्पादन क्षमता

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खुटहन। काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में प्रो. जेपी वर्मा की अगुवाई में संचालित जैव उर्वरक शोध में काम कर रहे छात्रों ने रविवार को क्षेत्र के कई गांवों का भ्रमण कर किसानों को जैनिक खाद के उपयोग और उत्पादन पर पड़ने वाले लाभ को बताया। क्षेत्र के दरना, लवायन और भागमलपुर गांव में किसान के बीच गोष्ठी व बैठक कर जैविक खेती के लिए जागरुक किया। शोध केंद्र के छात्र गोवर्धन चौहान, अर्पन मुखर्जी और आनंद कुमार ने कहा कि किसान अधिक से अधिक जैविक खाद का प्रयोग करें तो उसे जहां लागत में कमी आएगी वहीं उत्पादन पचीस से तीस फीसदी तक अधिक मिलेगा। छात्रों ने रासायनिक खाद से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। जैविक खाद के प्रयोग का लाभ भी समझाया। किसानों को बताया कि अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से मृदा शक्ति गिरती जा रही है। ऐसे ही चलता रहा तो एक दशक बाद खेत ऊसर बन जाएगे। किसानों को बताया कि जैविक का प्रयोग उत्पाद बृद्धि ही नहीं करता वरन इससे पेट व शरीर दर्द, अल्सर, कैंसर, हार्ट अटैक, लकवा, नपुंसकता और हड्डियों के कमजोर होने जैसे रोगों से बचाव भी होता है। इसका प्रयोग गेहूं, चना, मटर, सरसो, मक्का, अरहर और सब्जियों में कर किसान लाभ उठा सकते हैं। किसानों को दस दस बिस्वा फसलों पर छिड़काव के लिए मुफ्त जैविक खाद दी गई। इस मौके पर प्रमोद, संजय, सभाजीत, मिठाई लाल, रामधनी, शिवपूजन, जितेन्द्र, प्रदीप आदि मौजूद रहे।
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