मछलीशहर। तहसील क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं आने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है। बटनहित, मतरी, चौकीखुर्द, घिसुआंखुर्द सहित दर्जनों गांवों के किसानों ने 24 नवंबर को उपजिलाधिकारी जेएन सचान को ज्ञापन देकर नहरों में पानी छोड़वाने की मांग की थी। मगर अभी पानी नहीं आया। तहसील क्षेत्र के कुल 514 गांवों में कृषि का क्षेत्रफल तकरीबन 57 हजार हेक्टेयर है। इसमे 53 हजार हेक्टेयर सिंचित भूमि है, जिसमें 21 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई नहरों से की जाती है। इन नहरों में अभी तक पानी नहीं आने के कारण जहां कुछ किसान गेहूं, जौ आदि की पलेवा के लिए परेशान हैं वहीं मटर, सरसों आदि फसलों की पहली सिंचाई नहीं हो पा रही है। बटनहित, मंतरी, घिसुआ खुर्द, चौकी खुर्द आदि गांवों के किसानों ने विकास यादव के नेतृत्व में पानी खोलवाने के लिए ज्ञापन भी दिया था। चौकीखुर्द निवासी विनय पांडेय आदि का कहना है कि शारदा सहायक खण्ड 39 से निकलने वाली सिसवां माइनर में दो वर्षों से पानी नहीं आ रहा है। इससे चौकीकलां, अगहुआ, गोधना, किसुनदासपुर के किसान सिंचाई से बंचित हैं। वहीं चौकीखुर्द माइनर में पानी न सवैया, चौकीखुर्द आदि गांवों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। कुंवरपुर माइनर में पानी नहीं आने से बटनहित, खजुरहट, कोढ़ा, जहांसापुर के किसान परेशान हैं। अजय सिंह ने बताया कि सिंचाई खण्ड जौनपुर से गिसुआखुर्द माइनर बिल्कुल सूखी है। मतरी निवासी अजय प्रताप सिंह, घघरिया निवासी इंद्रजीत सिंह का कहना है कि मछलीशहर रजवाहा में पानी नहीं आने से मंतरी, घघरिया, पहाड़पुर, निकामुद्दीनपुर, रसूलपुर, जमालपुर आदि गांवों के किसानों की रबी की फसल बर्बादी के कगार पर है। कमोबेश यही स्थिति पूरे तहसील क्षेत्र की है। नहरों में पानी नहीं आने के कारण किसान निजी नलकूप, पंपिंगसेट आदि साधनों का सहारा ले रहे हैं।