जौनपुर। खुले में शौच रोकने के लिए निगरानी समितियां बनाई गईं। वे कुछ महीनों तक गांवों में सुबह रोकटोक करती थीं। मगर अब ह काम बंद हो गया है जबकि लोग खुले में शौच कर रहे हैं। शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत लोगों को खुले में शौच से रोकने और शौचालय का प्रयोग करने हेतु प्रेरित करने के लिए 1749 ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियों का गठन किया था। समिति को गांवों में लोगों को खुले में शौच करने से रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। निगरानी समितियों में शुरुआत में तो चुस्ती से काम किया लेकिन अब ढीली पढ़ गई है। मार्निंग फालोअप लगभग ठप है। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है तो खुले में शौच रुक भी नहीं रहा है। समितियां लोगों को जागरूक भी नहीं कर रही हैं। जिले का एक भी ग्राम पंचायत ऐसा नहीं है, जहां लोग खुले में शौच नहीं कर रहे हो। सुबह होते ही घर से लोग शौच करने के लिए निकल पड़ते हैं। निगरानी समिति में संबंधित गांव के ही लोगों को सदस्य बनाया गया है। इनका गठन ग्राम प्रधान व सचिव द्वारा किया गया है। इनके द्वारा गांव के इच्छुक लोगों को सदस्य बनाया गया है। एक समिति में 15 सदस्य हैं। जिसमें पांच महिला, पांच पुरुष और पांच युवा हैं। समितियों के सदस्यों को किसी तरह का प्रोत्साहन नही मिलता लिहाजा वे काम ही नहीं कर रहे हैं।