जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विधि विभाग की ओर से संकाय भवन के कांफ्रेंस हाल में सोमवार को संगोष्ठी आयोजित की गई। ‘इलेक्ट्रॉनिक युग में भारतीय संविधान की प्रस्तावना की प्रासंगिकता’ विषय पर शिक्षकों ने अपने विचार रखे।
संगोष्ठी में बीए एलएलबी पाठ्यक्रम के समन्वयक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने कहा कि सूचना क्रांति ने सरकारों को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का काम किया है। सरकारी आंकड़े और सूचनाएं आसानी से हर किसी तक पहुंच रही हैं। साथ ही जनमानस की राजनीतिक सामाजिक सहभागिता बढ़ी है। इससे भारतीय संविधान के मूल लक्ष्य को प्राप्त करना आसान हुआ है। प्रो. अजय द्विवेदी ने कहा कि ई-गवर्नेंस के चलते सरकार की पहुंच जनता तक और जनता की पहुंच सरकार तक आसान हुई है। सरकारों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। डॉ. अनुराग मिश्र ने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना रेस्टोरेंट के मीनू की तरह है। जैसे हम मीनू में देखकर समझ जाते हैं कि रेस्टोरेंट में खाने के क्या सामान है, उसी प्रकार संविधान की प्रस्तावना को देखते ही पूरे संविधान की झांकी मिल जाती है। डॉ. मंगल प्रसाद यादव ने आईटी एक्ट 2000 पर प्रकाश डाला। डॉ. बनिता सिंह ने सामाजिक और आर्थिक न्याय पर बल दिया। संचालन डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने किया।