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जर्जर सड़कों से बसों की रफ्तार धीमी,लग रहा अधिक समय

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जौनपुर। जनपद की खराब सड़कों का खमियाजा परिवहन निगम को भुगतना पड़ रहा है। जर्जर सड़कों से रोडवेज बसों की रफ्तार धीमी हो गई है । जिससे अधिक समय भी लग रहा है।साथ ही उनके फेरे भी कम हो गए हैं। इसके कारण परिवहन निगम को रोजाना तकरीबन एक से डेढ़ लाख रुपए का घाटा हो रहा है।
रोडवेज डिपो से कुल 93 बसों का संचालन किया जाता है। जिसमें 86 बसें परिवहन निगम की और 7 बसे अनुबंधित है। इन बसों को जौनपुर से वाराणसी, लखनऊ, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, मिर्जापुर, आजमगढ़, गोरखपुर , बदलापुर, सुजनागंज, रानीपुर, हिसामपुर, जंघई, ऊंचगांव, नहोरा व राजेपुर आदि िस्थानों के लिए चलाया जाता है। लेकिन इन स्थानों को जाने वाली अधिकांश सड़के क्षतिग्रस्त है। जिसमें मुख्य रुप से वाराणसी, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, मिर्जापुर, हिसामुपुर,जंघई व आजमगढ़ सहित आदि स्थानों की सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। सड़कों पर गड्ढ़े बन गए हैं। जिससे रोडवेज बसों की रफ्तार धिमी हो गई है। बसे अपने निर्धारित गति से सड़कों पर नहीं दौड़ पा रही है। वहीं समय भी अधिक लग रहा है। सूत्रों की मानें तो लांग रुट की बसों को छोड़कर शेष बसों को उसी दिन रोडवेज डिपो में वापस आना चाहिए। लेकिन सड़कें खराब होने से अधिकांश बसें दूसरे दिन रोडवेज डिपो में वापस आ रही है। जिससे बसों से रोडवेज डिपों को रोजाना तकरीबन 8 से 9 लाख रुपए की आय हो रही है । जबकि सड़कें ठीक रहती तो 10 से साढ़े दस लाख रुपए की आय होती ।
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एक से दो घंटे लग रहा अधिक समय
जौनपुर। सड़कें क्षतिग्रस्त होने से बसों को पहुंचने में एक से दो घंटे अधिक का समय लगर रहा है। जौनपुर से वाराणसी की दूरी 64 किमी. है। इस दूरी को तय करने में डेढ़ घंटे लगाना चाहिए। लेकिन तीन घंटे का समय लग रहा है। वहीं लखनऊ की दूरी 251 किमी. है। इस दूरी को तय करने में सात की बजाय साढ़े आठ घंटे का समय लग रहा हैं। आजमगढ़ की दूरी 64 किमी. है। इस दूरी को तय करने में डेढ़ घंटा की बजाय ढ़ाई घंटा का समय लग रहा हैं। इलाहाबाद की दूरी 121 किमी. है। इस दूरी को तय करने में तीन की बजाय पांच घंटे का समय लग रहा हैं। मिर्जापुर की दूरी 90 किमी. है। इस दूरी को तय करने में तीन की बजाय साढ़े चार घंटे का समय लग रहा है।

58 बसों में नहीं लगी है आलव्हेदर बल्ब
जौनपुर। ठंड का मौसम शुरु हो गया है। कोहरा भी पड़ने लगी है। लेकिन अभी तक रोडवेज डिपों के सभी बसों में आलव्हेदर बल्ब नहीं लगाया गया है। हलांकि डिपो से संचालित होने वाली 93 बसों में से मात्र 35 बसों में ही अभी तक आलव्हेदर बल्ब लगाया गया है। अभी भी 58 बसों में आलव्हेदर बल्ब नहीं लगा पाया है। पहले बसों में यह बल्ब नहीं लगाया जाता था। इस बल्ब के स्थान पर फाग लाइट का प्रयोग किया जाता था। जिससे भी दुर्घटना होने की घटना में कमी नहीं आ पाई। इसके बाद परिवहन निगम ने इस बार पड़ने वाली ठंड व कोहरे से दुर्घटना न हो। इसके लिए इस बल्ब का प्रयोग किया जा रहा है। इस बल्ब की खासियत यह है कि उसका प्रकाश मौसम के अनुसार बदलता रहेगा।
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सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से एक से डेढ़ लाख रुपये का रोजाना हानी हो रही है। अगर सड़कें ठीक रहती तो प्रति दिन रोड़वेज को 10 से साढ़े 10 लाख रुपये की आय होती । लेकिन इस समय आठ से नौ लाख रुपये हो रही है। इसका कारण सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से बसें धीमी रफ्तार से चल रही है। जिससे समय भी अधिक लग रहा है। बसें दूसरे दिन वापस लौट रही हैं। बसों में आलव्हेदर बल्ब लगाने का कार्य किया जा रहा है। शीघ्र ही सभी बसों में आलव्हेदर बल्ब को लगावा दिया जाएगा।
केशरी नंदन चौधरी
एआरएम, रोडवेज
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