सतहरिया। मुंगराबादशाहपुर के कटरा मोहल्ला स्थित बलिभद्र पैलैस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पांचवें दिन आचार्य मनोज पांडेय ने गुरु की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि आंखों को निंदनीय चीजों पर केंद्रित करने से अमंगलकारी फल मिलता है। वहीं, ईश चरणों और उनके दिव्य दर्शन में लगाने से फल मंगलकारी हो जाता है। कहा कि बिना गुरु के मानव जीवन अधूरा है। सद्गुरु के माध्यम से ही सुपथ तथा कुपथ के भेद को जाना जा सकता है। असली संत वह है जो कुमार्गी को अपने ज्ञान से सत्यमार्गी बना दें। संत की कृपा का प्रतिफल रहा कि लूटपाट करने वाले डाकू अजामिल की वेश्या पत्नी के गर्भ से पैदा हुए बच्चे का नाम नारायण रखवाकर उसका उद्धार कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वर्ग व्यक्ति के कर्मों से मिलता है। संस्कार जीवन जीने की कला सिखाती है। संस्कार का ही प्रभाव रहा कि अभिमन्यु अपनी माता सुभद्रा के गर्भ में ही चक्रव्यूह की कला में पारंगत हो गया था। आचार्य ने कृष्ण जन्मोत्सव की लीला का रोचक वर्णन किया। भगवान कृष्ण का जन्म होते ही पूरा परिसर भगवान कृष्ण के जयकारों, नृत्य और मंगल गीतों से गूंज उठा। संचालन ओमप्रकाश टैगोर ने किया। इस दौरान राजेंद्र तिवारी, शिवम, सत्यम, दीपक आदि मौजूद थे।