केराकत। स्थानीय तहसील क्षेत्र के तीन गांवों में बने हाटपैड उद्देश्यविहीन साबित हो रहे हैं। इन हाटपैडों को ऐसे स्थानों पर बना दिया गया है। जहां किसानों को अपने सामान बेचने में दिक्कत कर सामना करना पड़ रहा था। जिससे अजीज आकर किसान फिर अपने पुराने स्थानों पर सामान बेच रहे हैं। आठ वर्ष पूर्व कृषि उत्पादन वस्तुओं को क्त्रस्य-विक्त्रस्य कराने के उद्देश्य से जनता को सस्ता एवं सुलभ दुकान उपलब्ध कराने के लिए तहसील के उमरी, हुरहुरी व शहाबुद्दीनपुर गांव में हाटपैड बनवाया गया। इन हाटपैड को बनाने में लगभग लाखों रूपए खर्च हुए हैं। अब ये पशुओं के चारागाह और उनके आरामगाह बन गए हैं। हालत यह है कि हाटपैड पर लगे हैंडपंप खराब हो चुका है। जबकि शौचालय जर्जर अवस्था में है। हाटपैड पर लगा टीनशेड भी जगह जगह टूट गया है। जिसके कारण हाटपैड विरान पड़ा हुआ है।