मुफ़्तीगंज। वृंदावन से पधारी मधुप्रिया शुक्ला ने कहा कि अगर श्रद्धा के साथ श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी कथा है। वह बेलांव की ग्राम प्रधान शशिकला के आवास पर प्रवचन कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने शिकार के पीछे दौड़ते-दौड़ते प्यास से व्याकुल हो गए। शृंगी ऋषि के आश्रम में पहुंचे। तपस्या में लीन ऋषि से राजा ने ऋषि से पानी पिलाने की प्रार्थना की लेकिन ऋषि से सुना नहीं। राजा ने क्रोध में पास पड़े सांप को धनुष से उठाकर उनके गले मे डाल दिया। ऋषि पुत्र को किसी बालक ने राजा की करतूत के बारे में बता दी। ऋषि पुत्र ने शाप दे दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग उसके जीवन को समाप्त कर देगा। ऋषि को इस बात का पता चला तो उन्हें दुख हुआ। उन्होंने कहा तूने आवेश में ठीक नहीं किया। बाद में राजा ने अपने पुत्र जनमेजय को राज तिलक करने का आयोजन किया। इसी बीच ऋषि का शिष्य जाकर राजा को श्राप की बाबत बता दिया। राजा परीक्षित गंगा नदी में मचान बनाकर श्रीमद्भागवत का श्रवण किया तो उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। आयोजक गुड्डू सिंह, अनिरुद्ध सिंह, जय प्रकाश सिंह, नागेश सिंह आदि मौजूद है।