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श्रीराम चरित मानस है जीवन की आचार संघिता हैं: विद्यार्थी

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बक्शा/ बदलापुर। कथावाचक पंडित विद्यार्थी महराज ने कहा कि श्री राम चरित मानस जीवन की आचार संहिता है। श्री राम चरित मानस के प्रत्येक पात्र और हर घटना से मानव जीवन को आदर्श प्राप्त होता है। जिस समय भगवान शिव जी का धनुष टूटा लोगों ने धनुष से पूछा कि तुम टूट क्यों गए। धनुष ने जवाब दिया कि मैं भी टूटना नहीं चाहता था किंतु जब मुझे पता चला कि मेरे मात्र टूटने से बहुत से लोग आपस में जुड़ जाएंगे, जैसे राम और सीता, दशरथ और जनक, अयोध्या और जनकपुर, जनकपुर की कृषि संस्कृति, अयोध्या की संस्कृति के साथ-साथ राजतंत्र और साम्यवाद की तरह अनेक लोग जुड़ रहे हैं, तो अकेले मेरा टूटना भी समाज के लिए कल्याणकारी है। इस मौके पर जपाकर मिश्र, शाश्वत मिश्र, अच्छेलाल सिंह, मानसी, दीक्षा, वेदाकर, कमलाकर, जेठू मौर्या, रविकर, सुनीता मिश्र, विनोद सेठ, वशिष्ठ, कल्लू, नागरनाथ, फूलचंद्र मौर्या, नाटे मिश्र, जय प्रकाश मिश्रा, शशिकर, मनीष मौर्या, खुशी मिश्र, दुर्गावती देवी, अनन्या, पप्पू तिवारी आदि लोग मौजूद थे।
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