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रेफर सेंटर बन गए सीएचसी और पीएसची

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जौनपुर। जिले अधिकांश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बन कर रह गए हैं। इन सेंटरों पर तैनात चिकित्सक और कर्मचारी मरीजों को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं उठाना चाहते। प्राथमिक उपचार के नाम पर खानापूर्ति करके मरीजों को रेफर करना मुनासिब समझते हैं। सुविधा नहीं होने के कारण मरीज भी सीएचसी और पीएचसी पर जाने से कतराते हैं। सीएचसी और पीएचसी से एक माह में रेफर होने वाले मरीजों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो
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मछलीशहर सीएचसी से एक माह में सात मरीजों को रेफर कर दिया गया। जाफराबाद: हौज ट्रामा सेंटर पर नवंबर माह में 29 मरीज रेफर किया गया। जलालपुर: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जलालपुर से 20 को जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। बदलापुर: सीएचसी से 24 मरीजों को उपचार के लिए रेफर किया गया। खेतासराय: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सोंधी पर नौ को रेफर किया। मीरगंज: प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मीरगंज से दो लोगों को सीएचसी मछलीशहर रेफर किया गया। मडियाहूं: सीएचसी पर से 39 लोगों को रेफर किया। डोभी: सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द बीरीबारी (डोभी) से 13 मरीज को रेफर किया गया। रामपुर: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से इस माह 30 मरीज को रेफर किए गए। बक्शा: सीएचसी से नवम्बर माह में अब तक आकस्मिक सात मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। सिरकोनी: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नेहरू नगर से 12 मरीज रेफर किया गया। सतहरिया: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नवम्बर माह 4 मरीज रेफर किए गए।
शाहगंज सीएचसी से नवंबर महीने में 47 मरीजों को रेफर किया गया। मुंगराबादशाहपुर: प्राथमिक स्वास्थ् केन्द्र में आए 13 मरीजों को रेफर किया गया। केराकत: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से चार को रोगियों को रेफर किया गया। करंजाकला: प्राथमिक स्वास्थ केंद्र करंजाकला में 30 लोगों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया।
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मरीजों को रेफर करने में जिला अस्पताल भी पीछे नहीं
जौनपुर। मरीजों का इलाज में खानापूर्ति करने में जिला अस्पताल भी पीछे नहीं है। किसी भी मरीज को लेकर डाक्टर और कर्मचारी जहमत नहीं उठाना चाहते हैं। मरीजों को सीरियश बता कर उन्हें बेहतर इलाज के नाम पर तुरंत रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में एक माह के आंकड़ों पर नजर डाले तो 15 अक्तूबर से 15 नवंबर के बीच इमरजेंसी के 1422 मरीज इलाज आए थे। जिसमें 243 को वाराणसी और दूसरे जनपदों में इलाज के लिए भेज दिया गया। हालत यह है कि छोटी सी बीमारी के बाद भी मरीजों को रेफर करना आदत बन गई है। बक्शा क्षेत्र में बलासतपुर के पास एक युवक को गोली लग गई थी। जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल भर्ती कराने के लिए परिजन ले गए। जिला अस्पताल में उसे भर्ती करने के बजाय वाराणसी रेफर कर दिया गया। जबकि वाराणसी में चिकित्सकों ने उसका इलाज करके एक घंटे बाद ही छोड़ दिया।
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