बक्शा। भरत ने जहां चौदह वर्ष तक त्याग तो लक्ष्मण ने बड़े भाई राम के साथ रह भ्रातृत्व धर्म का निर्वहन किया। भरत का चित्रण पारिवारिक एकता की मिसाल है। कथा वाचक पण्डित निर्मल कुमार शुक्ल ने बक्शा विकास खण्ड के गौराखुर्द निवासी शारदा प्रसाद सिंह के आवास पर पांच दिवसीय श्रीराम कथा मानस के चौथे दिन सोमवार को भक्तों के बीच कही। उन्होंने ने कहा कि भगवान श्री राम को मर्यापुरुषोत्तम कहा गया है। उन्होंने कहा कि भरत जब ननिहाल से अयोध्या आते है तो माता कैकेई के मुख से राम को 14 वर्षों का बनवास सुन व स्वयं के लिए राजगद्दी सुन क्रोधित हो जाते है। भरत कहते है कि ऐसा कहते हुए तेरी जिह्वा टूट क्यों नही गई। मुंह में कीड़े पड़ जाने चाहिए थे। मानस मर्मज्ञ प्रकाशचंद्र विद्यार्थी ने कहा कि रामचरित मानस परिवार को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। विद्यार्थी ने कहा कि रामकथा सुनने मात्र से समस्त कष्टों का निवारण होता है। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस मानव, पशु, पक्षी, कोल भील, छुआछूत का भेद मिटाने का महान ग्रन्थ है। इस दौरान सेवानिवृत्त कमिश्नर गौरीशंकर सिंह, जितेंद्र सिंह, मार्कंडेय सिंह, अनित कुमार सिंह, अजय कुमार वर्मा, घनश्याम सिंह, दीनानाथ तिवारी, पारसनाथ मिश्र मौजूद रहे। संचालन हरिशंकर शुक्ल ने किया।