बक्शा। क्षेत्र के रन्नों गांव में शनिवार को अहले हरम की मदीने वतन वापसी की याद में जुलूस-ए-अमारी में दूर दराज से आई अंजुमनों ने शिरकत किया। उलेमाओं ने इमाम हुसैन एवं 72 साथियों की शहादत व परिवार पर हुए जुल्म की दास्तांन बताए तो मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गयी। जुलूस सुबह सात बजे शुरू हुआ जो शाम करीब सात बजे गांव स्थित रौजा ए रसूल पर ठंडा किया गया।
विदित है कि दस मोहर्रम सन 61 हिजरी को इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ शहादत के बाद उनके परिवार के सदस्यों को यजीद द्वारा शाम के कैदखाने में कर दिया गया था। जब कैद से रिहाई मिली तो परिवार के लोगों ने कर्बला जाकर शहीदों के लाशों को दफन किया और अपने मदीने लौटे। उसी याद में अहले हरम की मदीने वापसी के कहर जुलूस-ए-अमारी का आयोजन किया गया। अमारी में देश व प्रदेश के कोने-कोने से आई अंजुमनों ने जुलूस की शक्ल में गांव भ्रमण करते हुए शाम करीब सात बजे गांव में स्थित रौजा ए रसूल पर पहुंचा जहां अंजुमन इमामिया रन्नों द्वारा नौहा पेश करने के बाद अमारीया ठंडा की गई।