जौनपुर। दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को सुबह गोवर्धन पूजन, गौ-पूजन एवं अन्नकूट पर्व मनाया गया। सुबह घर के सामने गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर बीच में श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा की गई। इसके साथ गाय की पूजा भी गई। इस दिन चंद्र दर्शन अशुभ माना जाता है। भगवान को इस दिन विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर अर्पित किया गया। घर के सामने रंगोली बनाई गई। शहर के रासमंडल में श्रीकृष्ण रसिया संगठन की ओर से सामूहिक रूप से गोवर्धन की पूजा की गई। आचार्यो ने विधि विधान से गोवर्धन पूजन कराया। गोवर्धन पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया।
जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर रखा। गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुख पूर्वक रहे। सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा। भगवान श्रीकृष्ण ने आज के दिन से ही गोवर्धन, गौ-धन की रक्षा के लिए पूजा की शुरूआत की थी। श्रीकृष्ण ने कहा था कि वृक्ष हमें फल देते है और ऐसे में हमे उनका पूजन-वंदन करना चाहिए। वह हमारी प्रकृति की रक्षा करते हैं। इस प्रकार भगवान कृष्ण ने ब्रज में इंद्र की पूजा के स्थान पर कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोवर्धन पूजा की परंपरा शु्रू किया था। इस दिन कई लोग गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराते हैं। उनके पैर धोते हैं तथा फूल, माला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन करते हैं। गायों को मिष्ठान खिलाकर उनकी आरती की।