बरईपार। क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चांदपुर पर मरीजों के लिए सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। स्टाफ की कमी के कारण लोगों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस केंद्र पर दो डाक्टर, एक फार्मासिस्ट व एक स्टाफ नर्स की तैनाती की गई है। इतना ही नहीं यहां दस डाक्टर, छह स्टाफ नर्स, दो फार्मासिस्ट, तीन वार्डब्वाय, तीन स्वीपर की पोस्ट खाली पड़ी है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतने बड़े अस्पताल में रोगियों का इलाज करने की बजाय अस्पताल स्वयं ही बीमार है।
सिकरारा ब्लॉक की आबादी लगभग एक लाख के करीब है। जिसमें पकड़ी पीएचसी, भी आती हैं। यहां मरीजों का इलाज राम भरोसे चल रहा है। सीएचसी पर बेहतर सुविधाएं देने का दावा हवाई बनकर रह गया है। राज्य सरकार व स्वास्थ्य विभाग यहां रिक्त पड़े डॉक्टरों के पदों को नहीं भर पाया है। अस्पताल में महिला डाक्टर की तैनाती नहीं होने से महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां आधुनिक जांच की मशीनें होना तो दूर की बात बिजली जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाती। स्वास्थ्य केंद्र में बिजली न होने के कारण इलाज के लिए आए मरीजों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। प्रदेश सरकार ने सभी अस्पतालों को हॉट लाइन से जोड़ दिया है। क्षेत्र के धरणीधर सिंह, पंकज सिंह, अतुल कुमार, अनिल सिंह का कहना है कि सरकार की यह योजनाएं कागजों तक ही सिमट कर रह गई हैं। स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था न होने से क्षेत्र के मरीजों को जिला मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ती है। रोगियों को बाहर महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। एसएमओ डॉ. श्यामधर ने बताया कि वे कई बार विभाग के उच्चधिकारियों को लिखित रूप से सूचना दे चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।