जौनपुर। गोमती नदी में गिर रहे नालों (ड्रेन) के गंदे पानी को रोकने के लिए नमामि गंगे योजना के तहत जल निगम ने हाल ही में फिर प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजा है। इस बार 255.19 करोड़ का प्रस्ताव नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा (एनएमसीजी) को भेजा गया है। इसके पहले जल निगम ने 223.329 करोड़ का प्रस्ताव भेजा था। जिस पर नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा की ओर से आपत्ति लगा दी गई थी। इसके बाद संशोधित प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। ंजूरी मिलने के बाद सब कुछ ठीक रहा तो नदी में गंदे नालों का पानी नहीं रोका जा सकेगा।
शहर की आबादी तीन लाख से अधिक है। जिसमें 39 वार्ड हैं। इस दौरान शहर क्षेत्र में लगभग एक दिन में 20 मिलियन लीटर गंदा पानी गोमती नदी में 14 नालों के माध्यम से गिरता है। जिससे गोमती नदी का जल दूषित हो रहा है। इन नालों का गंदा पानी गोमती नदी में गिरने से बचाने के लिए जल निगम की ओर से नामामि गंगे योजना के तहत एक साल पहले 223.12 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। जिसमें इन नालों के गंदे पानी को पंचहटिया में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान बनाकर शुद्ध करने का प्रस्ताव था। इसके लिए पांच हेक्टेयर भूमि भी चयन कर लिया गया था। इस प्रस्ताव पर नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा की ओर से आपत्ति लगाई गई थी। कहा गया कि जब शहर क्षेत्र को गोमती नदी दो भागों में बांट रही तो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी दो बनाए जाएं। शहर के दोनों हिस्सों में एक -एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद जल निगम ने गोमती नदी के दो हिस्से में बटे क्षेत्रों में भूमि की खोज की गई । लेकिन भूमि नहीं मिली। जिसकी जानकारी जल निगम ने नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा को दी। जिसके बाद फिर से प्रस्ताव बनाकर भेजने का निर्देश जल निगम को दिया गया। जल निगम ने चार दिन पहले फिर प्रस्ताव बनाकर केद्र सरकार व नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा को भेजा है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए पंचहटियां में भूमि खोजी गई है। इसके लिए पांच हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है।
इन नालों का गिरता है गंदा पानी
जौनपुर। गोमती नदी में मुफ्ती मोहल्ला ड्रेन, मलुवान टोला ड्रेन, तुतीपुर ड्रेन,हनुमानघाट ड्रेन,किला मोहल्ला ड्रेन,बलुआघाट ड्रेन,रासमंडल ड्रेन,अचला देवी घाट ड्रेन,कटघरा घाट ड्रेन,जोगियापुर ड्रेन,मियांपुर ड्रेन,हरईपुर ड्रेन,शेखुपुर ड्रेन व अहियापुर ड्रेन आदि का पानी गिरता है।
नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के आपत्ति जताने के बाद नमामि गंगे योजना के तहत 255.19 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। पहले भेजे गए प्रस्ताव पर एक ही स्थान पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। जिस पर आपत्ति लगाकर फाइल वापस कर दी गई थीं। गोमती नदी के कारण दो भागों में बटे शहर के दोनों क्षेत्रों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए भूमि का चयन करने का निर्देश दिया गया था।
एके सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम