फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मनुष्य को उसके कर्म के हिसाब से मिलता है जन्म

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

जौनपुर। स्वामी नारायणानंद तीर्थ ने कहा कि शरीर की मृत्यु होने पर आत्मा की उन्नति में कोई बाधा नहीं आती है। बरसठी विकास खंड के सिद्धनाथ बाबा सिद्धार्थ आश्रम असवां रामपुर में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के पहले दिन उन्होेंने रविवारि को कहा कि मनुष्य को अगला जन्म उसके कर्म के हिसाब से ही मिलता है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि आत्मा की उन्नति शरीर की मृत्यु के कारण जहां से छूट जाएगी अगले जन्म में उससे आगे की प्रगति होती है। अगर व्यक्ति सत्कर्म में जीवन त्यागता है तो सत्कर्म और दुष्कर्म में त्यागे तो दुष्कर्मी के रूप में अगला जन्म होता है। अधर्म का फल अशांति और दु:ख है। इसके विपरीत जो नर-नारी धर्म निष्ठ रहकर शरीर का परित्याग करेगा तो वह धर्मनिष्ठ होगा। शरीर छूटना तो कपड़े बदलने जैसा है। शरीर छूटने से आपकी गति में किसी प्रकार का अंतर आने वाला नहीं है। पूज्य शंकराचार्य जी ने बताया कि, आत्मा परमात्मा से भिन्न नहीं है, इसका साक्षात्कार हो जाए तो वह नर-नारी शिव स्वरुप, कल्याणकारी हो जाएगा, शिवमय हो जाएगा, सबके लिए कल्याणकारी होगा। अशोक शुक्ल, अखिलेश तिवारी अकेला, सोनू सिंह, नंदलाल सिंह, विजय शंकर पाण्डेय, बाबू भीम सिंह, मयंक सिंह, अम्बिका प्रसाद पाण्डेय, अर्जुन तिवारी पादुका पूजन व माल्यार्पण आशीर्वाद लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें