जौनपुर । करेक्टिव सर्जरी के लिए जिले में ना तो अस्पताल है और ना ही चिकित्सकीय टीम है। जिससे विकलांग विभाग द्वारा चयनित करेक्टिव सर्जरी के लाभार्थियों का उपचार नहीं हो पा रहा है। हाल यह है कि पिछले वित्तीय वर्ष में चयनित 45 करेक्टिव सर्जरी के लाभार्थियों का उपचार नहीं हो सका। उपचार के लिए आई धनराशि को वापस भेजना पड़ा। इसका खुलासा उस समय हुआ जब शासन ने स्वास्थ्य विभाग से जिले में स्थित करेक्टिव सर्जरी के अस्पताल की जानकारी मांगी। जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने शासन को पत्र भेजकर जिले में करेक्टिव सर्जरी के लिए कोई अस्पताल व चिकित्सकीय टीम नहीं रहने का पत्र भेजा है।
जिले में 10 से 25 आयु वर्ग के दिव्यांग लोगों को ठीक करने के लिए सरकार द्वारा करेक्टिव सर्जरी योजना संचालित की गई है। जिसमें करेक्टिव सर्जरी के लिए 10 हजार रुपया प्रति लाभार्थियों की दर से धनराशि भी दी जाती है। इस योजना के तहत विकलांग विभाग द्वारा हर साल बच्चों का चयन किया जाता है। इन चयनित लोगों की करेक्टिव सर्जरी सरकार द्वारा नामित चिकित्सकों की टीम आकर करती थी। लेकिन यह टीम भी जिले में दो वर्ष से नहीं आ रही है। जिससे वित्तीय वर्ष 2017-18 में चयनित 45 लाभार्थियों का करेक्टिव सर्जरी नहीं हो पाया है। जबकि सरकार द्यारा 100 करेक्टिव सर्जरी करने का लक्ष्य मानकर एक लाख रुपये विभाग को भेज दिया था। जिसे विभाग को वापस करना पड़ा।वहीं चालू वित्तीय वर्ष में विकलांग विभाग द्वारा सर्वे कर 28 लाभार्थियों का चयन किया है।
करेक्टिव सर्जरी के लिए तीन डाक्टरों का होना है जरुरी
जौनपुर। करेक्टिव सर्जरी के लिए चिकित्सकीय टीम में तीन चिकित्सकों का होना जरुरी है। इसमें प्लास्टिक सर्जन, ऑर्थो सर्जन व न्यूरो सर्जन का होना आवश्यक है। इन चिकित्सकों के बिना करेक्टिव सर्जरी नहीं हो सकती है।
करेक्टिव सर्जरी करने के लिए शासन द्वारा जिले में अस्पताल व चिकित्सकों की जानकारी मांगी गई थी। इसके लिए जिले में एक भी अस्पताल और चिकित्सक के नहीं होने की सूचना पत्र के माध्यम से शासन को भेज दी गई है।
डा.रामजी पांडेय, मुख्य चिकित्साधिकारी