मछलीशहर। आदर्श रामलीला समिति छाछो के मंच पर भरत मनावन की लीला हुई। राम को भरत अयोध्या आते ही मनाने वन चले गए। गुरु वशिष्ठ और माताओं के साथ गए भरत राम, सीता और भाई लक्ष्मण को देखकर दुखी हो गए। उन्होंने अपनी माता द्वारा किए गए कृत्य के लिए क्षमा याचना की। अयोध्या के राज सिंहासन का त्याग करने की घोषणा कर दी। गुरु वशिष्ठ ने भी राम को भरत की मंशा से अवगत कराया किंतु राम ने पिता को दिए गए वचन का पालन करने की प्रतिबद्धता दोहराई। आखिर में राम के खड़ाऊं लेकर भरत लौट आए और अयोध्या के राज सिंहासन पर रखकर प्रतिनिधि के रूप में राज काज देखने के लिए देखने की घोषणा कर दी।